
देश के प्रमुख प्रबंधन संस्थानों में से एक, आईआईएम संबलपुर ने अपना 9वां दीक्षांत समारोह भव्य रूप से आयोजित किया। इस समारोह के साथ ही संस्थान ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि अपने नाम दर्ज की, जहां 370 छात्रों ने स्नातक की उपाधि प्राप्त की। इनमें से उल्लेखनीय रूप से 60% छात्र महिलाएं थीं, जो संस्थान में लैंगिक समानता और समावेशिता की दिशा में एक प्रेरणादायक संकेत है।
पांच विभिन्न कार्यक्रमों के छात्रों ने पूरी की डिग्री
इस बार IIM संबलपुर के लिए यह पहला अवसर था जब पाँच अलग-अलग शैक्षणिक कार्यक्रमों के छात्रों ने अपनी शिक्षा पूरी की। इन कार्यक्रमों में 316 छात्रों का 9वां एमबीए बैच (2023-25), कार्यकारी एमबीए में 38 छात्रों का दूसरा बैच (2022-24), वर्किंग प्रोफेशनल्स एमबीए में 10 छात्रों का पहला बैच (2023-25), 6 पीएचडी स्कॉलर और वर्किंग प्रोफेशनल्स पीएचडी का बैच शामिल है।
शैक्षणिक उत्कृष्टता को मिला सम्मान
छात्रों की शैक्षणिक उपलब्धियों को समारोह में विशेष मान्यता दी गई। एमबीए, एग्जीक्यूटिव एमबीए और वर्किंग प्रोफेशनल्स एमबीए प्रोग्राम के प्रतिभाशाली छात्रों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए चेयरमैन गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया।
विशेष आकर्षण का केंद्र रहे 80 वर्षीय उद्यमी जी.एम. गुप्ता, जिन्होंने वर्किंग प्रोफेशनल्स एमबीए प्रोग्राम में दाखिला लेकर न केवल अपनी शिक्षा पूरी की, बल्कि यह संदेश भी दिया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती।
मुख्य अतिथि डॉ. पी.के. मिश्रा का प्रेरक संदेश
समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। अपने संबोधन में उन्होंने छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने का संदेश दिया और भारत को $5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनाने के सपने को केवल एक आर्थिक लक्ष्य नहीं, बल्कि गरीबी उन्मूलन, विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा सुरक्षा और डिजिटल सशक्तिकरण का ब्लूप्रिंट बताया।
उन्होंने कहा, “हम एक अभूतपूर्व तकनीकी युग में प्रवेश कर चुके हैं। आपूर्ति शृंखलाएं पुनर्परिभाषित हो रही हैं, व्यापारिक रिश्ते नया रूप ले रहे हैं, और जलवायु परिवर्तन हर संवाद का केंद्रीय विषय बन गया है। भविष्य हमें विरासत में नहीं मिलेगा, उसे हमें खुद बनाना होगा।”
IIM संबलपुर का यह दीक्षांत समारोह केवल डिग्रियों का वितरण नहीं था, बल्कि यह भविष्य के नेताओं, उद्यमियों और नीति निर्माताओं के संकल्प और सामर्थ्य का उत्सव भी था।




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