
दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध श्री अरबिंदो कॉलेज की संस्था मीमांसा द्वारा छात्रों में नैतिक शिक्षा और अनुशासन के माध्यम से भारतीय ज्ञान परम्परा को विकसित करते के उद्देश्य से सेमिनार हॉल में ‘महिला सशक्तिकरण और युवा नेतृत्व’ विषय पर विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ राज्यसभा की सांसद व राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रेखा शर्मा ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर अरुण चौधरी ने की, वहीं संस्था की संयोजक प्रो.संगीता कौल, संकाय समन्वयक हेमा नागपाल और मंच संचालन डॉ. शिखा नारंग ने किया। इस अवसर पर डॉ. हंसराज सुमन, प्रो. मीता माथुर, मीमांसा की अध्यक्ष कु. भारती बजाज, उपाध्यक्ष कु. अल दीबा, डॉ. मीनाक्षी चौधरी के अतिरिक्त बड़ी संख्या में छात्र, शिक्षक व कर्मचारी उपस्थित थे।
छात्रों को संबोधित करते हुए रेखा शर्मा ने कहा कि लैंगिक रूढ़िवादिता समाज में गहरी जड़ें जमाए हुए है जिनका परिवारों में उनकी ऐतिहासिक उपस्थिति के कारणों का पता लगाया जा सकता है और इन कारणों को चुनौती देने और बदलने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने युवाओं में दृढ़ विश्वास के साथ समानता और न्याय के पथप्रदर्शक बनने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने छात्रों के साथ अपने जीवन के अनुभवों को खुलकर साझा किया जिसमें आर्थिक रूप से संघर्षरत पृष्ठभूमि के छात्रों को सीमित संसाधनों के साथ आगे बढ़ने का रास्ता सुझाया। आगे उन्होंने कहा कि छात्रों आपकी निर्भीकता, दृढ़ संकल्प और अटूट विश्वास की भावना ही आपको मजबूत नेतृत्व प्रदान कर सकती है। रेखा शर्मा ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि लैंगिक समानता शब्दों से परे है; इसका प्रतिनिधित्व सभी वर्गों में समान अवसरों और सम्मान की भावना प्रदान करता है।
अध्यक्षीय वक्तव्य में कॉलेज के प्राचार्य प्रो.अरुण चौधरी ने कहा कि लैंगिक समानता हमारे समाज का सबसे संवेदनशील मुद्दा है। हमारे देश के प्रधानमंत्री ने पूरे भारतभर में लैंगिक समानता योजनाओं को लागू किया है, जिसमें प्रमुख रूप से बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ और लाडली योजना, सुकन्या समृद्धि योजना है। उन्होंने बताया कि हमारे कॉलेज में भी छात्राओं के लिए अनेक योजनाएं हैं। एनसीसी, एनएसएस, पाखी, मीमांसा, पृथ्वी आदि संस्थायें कार्यरत हैं जो लैंगिक समानता के समान अवसरों को सुगमता के साथ छात्राओं में लोकप्रिय है।
मीडिया संयोजक डॉ.हंसराज सुमन ने बताया कि आज के इस कार्यक्रम का समापन संवादात्मक प्रश्नोत्तर के साथ उत्साही माहौल के साथ हुआ, जो छात्र- छात्राओं की गहरी भागीदारी को दर्शाता है। मीमांसा संस्था और कॉलेज परिवार को इस तरह की सशक्त और विचारोत्तेजक चर्चा की मेजबानी करने का सम्मान मिला है जिसने सभी उपस्थित लोगों पर एक स्थायी प्रभाव छोड़ा। अंत में मीमांसा की संयोजक प्रो. संगीता कौल ने मुख्य वक्ता व छात्राओं का कार्यक्रम सफल बनाने पर धन्यवाद दिया।




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