
भारत के नए मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई ने बुधवार को पदभार संभाल लिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राष्ट्रपति भवन में शपथ दिलाई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। उन्होंने न्यायमूर्ति संजीव खन्ना का स्थान लिया, जो एक दिन पहले ही सेवानिवृत्त हुए।
गौरतलब है कि कानून मंत्रालय ने 30 अप्रैल को जस्टिस गवई की नियुक्ति की अधिसूचना जारी की थी। इससे पहले 16 अप्रैल को तत्कालीन CJI संजीव खन्ना ने परंपरा के अनुसार वरिष्ठतम न्यायाधीश के रूप में जस्टिस गवई के नाम की सिफारिश की थी।
न्यायिक करियर की झलक
न्यायमूर्ति गवई ने 16 मार्च 1985 को वकालत की शुरुआत की थी। उन्होंने नागपुर नगर निगम, अमरावती नगर निगम और अमरावती विश्वविद्यालय के लिए स्थायी वकील के रूप में सेवाएं दीं। उन्होंने अगस्त 1992 से जुलाई 1993 तक बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में सहायक सरकारी वकील और अतिरिक्त लोक अभियोजक के रूप में सेवा दी। 17 जनवरी, 2000 को उन्हें नागपुर खंडपीठ के लिए सरकारी वकील और लोक अभियोजक नियुक्त किया गया। 14 नवंबर, 2003 को वे बॉम्बे हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश बने और 12 नवंबर, 2005 को स्थायी न्यायाधीश नियुक्त हुए। 24 मई, 2019 को उन्हें सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनाया गया।
उन्हें सुप्रीम कोर्ट में कई महत्वपूर्ण संविधान पीठों का हिस्सा रहने का अनुभव है। दिसंबर 2023 में अनुच्छेद 370 पर ऐतिहासिक फैसले में वे पांच जजों की पीठ का हिस्सा थे, जिसने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा हटाने के केंद्र के निर्णय को सर्वसम्मति से बरकरार रखा।
पारिवारिक और सामाजिक पृष्ठभूमि
जस्टिस गवई का जन्म 24 नवंबर 1960 को अमरावती, महाराष्ट्र में हुआ। उनके पिता दिवंगत आर.एस. गवई एक प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता थे और बिहार व केरल के राज्यपाल भी रहे हैं। वे भारत के दूसरे अनुसूचित जाति समुदाय से आने वाले मुख्य न्यायाधीश बने हैं। उनसे पहले जस्टिस के.जी. बालाकृष्णन 2010 में यह पद संभाल चुके हैं।
जस्टिस बी.आर. गवई के प्रमुख फैसले
1. राजीव गांधी हत्याकांड (2022)
जस्टिस गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने 30 वर्षों से जेल में बंद दोषियों की रिहाई की अनुमति दी, क्योंकि राज्यपाल ने तमिलनाडु सरकार की सिफारिश पर कोई निर्णय नहीं लिया था।
2. वणियार आरक्षण मामला (2022)
तमिलनाडु सरकार द्वारा वणियार समुदाय को दिया गया आरक्षण सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक घोषित किया, यह निर्णय लिया गया कि यह अन्य पिछड़ा वर्गों के साथ भेदभाव करता है।
3. नोटबंदी (2023)
उन्होंने 2016 की नोटबंदी योजना को 4:1 बहुमत से वैध ठहराया। फैसला दिया गया कि यह केंद्र सरकार और रिज़र्व बैंक के बीच परामर्श से लिया गया निर्णय था और अनुपातिकता की कसौटी पर खरा उतरता है।
4. ईडी निदेशक का कार्यकाल विस्तार (2023)
जुलाई 2023 में गवई की बेंच ने ईडी निदेशक संजय कुमार मिश्रा का कार्यकाल विस्तार अवैध ठहराया और उन्हें 31 जुलाई तक पद छोड़ने का निर्देश दिया।
5. बुलडोजर कार्रवाई (2024)
जस्टिस गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने स्पष्ट किया कि सिर्फ आरोपी होने के आधार पर किसी की संपत्ति को ध्वस्त करना असंवैधानिक है। बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के कोई भी कार्रवाई नहीं की जा सकती और यदि की जाती है तो संबंधित अधिकारी उत्तरदायी होगा।
न्यायमूर्ति गवई की नियुक्ति भारतीय न्यायपालिका में समावेशिता और सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुभव और दृष्टिकोण से न्याय प्रणाली को और अधिक मजबूत और संवेदनशील बनाए जाने की उम्मीद की जा रही है।




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