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DPS द्वारका ने फीस न जमा करने पर 32 बच्चों को स्कूल से निकाला, अभिभावकों ने किया हाईकोर्ट का रुख 

दिल्ली के द्वारका स्थित डीपीएस स्कूल का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। आज सुबह एक बार फिर 32 बच्चों को स्कूल से यह कहकर बाहर कर दिया गया कि उनकी फीस जमा नहीं हुई है, जबकि दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि फीस विवाद के कारण किसी भी छात्र को पढ़ाई से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

स्कूल गेट पर तैनात बाउंसरों ने बच्चों को रोका, लड़कियों को छूने का आरोप
स्थिति और तनावपूर्ण तब हो गई जब स्कूल प्रबंधन ने गेट पर बाउंसर तैनात कर दिए। आरोप है कि जब कुछ छात्र-छात्राएं स्कूल में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे, तो पुरुष बाउंसरों ने लड़कियों को हाथ लगाकर रोका, जिससे अभिभावकों में आक्रोश फैल गया। परिजनों ने सवाल उठाया, “पुरुष बाउंसरों को लड़कियों को हाथ लगाने का अधिकार किसने दिया?”

पीटीएम में भी रोक, कोर्ट की अवमानना याचिका दायर
इतना ही नहीं, स्कूल ने इन 32 छात्रों के अभिभावकों को पीटीएम (पैरेंट्स टीचर मीटिंग) में भी शामिल होने की अनुमति नहीं दी। इससे नाराज़ परिजनों ने अब दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है और कॉर्ट की अवमानना (Contempt of Court) का मामला दर्ज कराया है।

9 मई को भी हटाए गए थे 29 छात्र, लगातार जारी है प्रदर्शन
इस विवाद की शुरुआत 9 मई को हुई थी, जब डीपीएस द्वारका ने 29 छात्रों को तत्काल प्रभाव से स्कूल से निकाल दिया था। इसके बाद से अभिभावक लगातार स्कूल के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं। कल भी अभिभावकों ने स्कूल गेट के बाहर विरोध जताया था।

आप नेता अतिशी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
आज सुबह ही आप पार्टी की नेता अतिशी ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र लिखा है और स्कूल की कार्रवाई पर गंभीर चिंता जताई है।

शिक्षा निदेशालय के आदेश की खुली अवहेलना
दिल्ली शिक्षा निदेशालय का आदेश है कि फीस विवाद की स्थिति में छात्रों की पढ़ाई बाधित नहीं होनी चाहिए, लेकिन डीपीएस द्वारका बार-बार इस आदेश की अवहेलना करता दिख रहा है। इससे न केवल छात्रों का मानसिक संतुलन बिगड़ रहा है, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र पर भी सवाल उठने लगे हैं।

अब देखना यह है कि हाईकोर्ट इस मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या छात्रों को न्याय मिल पाता है या नहीं।

 

 

Asmita Sarkar

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