
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में शैक्षणिक सत्र 2025–26 में पीएचडी दाखिले की पात्रता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। एक ओर लेफ्ट पैनल के जेएनयू छात्रसंघ के पदाधिकारी विश्वविद्यालय प्रशासन पर आरोप लगा रहे हैं कि वह जून में आयोजित होने वाले यूजीसी नेट के अंकों को दाखिला मानदंड में शामिल नहीं कर रहा है, वहीं दूसरी ओर एबीवीपी से जेएनयू छात्रसंघ में संयुक्त सचिव वैभव मीणा ने स्पष्ट किया है कि जून के यूजीसी नेट के अंक भी पात्रता में शामिल होंगे।
छात्रसंघ अध्यक्ष नीतीश कुमार ने बताया कि दाखिला शाखा के साथ हुई बैठक में दिसंबर के यूजीसी नेट के अंकों के आधार पर ही प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई, जो उनके अनुसार पूरी तरह से धोखाधड़ी है। उन्होंने कहा कि नेट के जरिये दाखिला प्रक्रिया अलोकतांत्रिक है। पिछले वर्ष भूख हड़ताल के दौरान प्रशासन ने आश्वासन दिया था कि वर्ष 2025–26 में पीएचडी दाखिले के लिए जेएनयू की प्रवेश परीक्षा वापस लाई जाएगी।
परीक्षा रद्द करने की वजह: फंड की कमी
इस विषय में सभी स्कूलों के डीन और स्पेशल सेंटर को पत्र भेजा गया था, जिसमें उनसे सुझाव मांगे गए थे। इसके बाद दोबारा एक बैठक हुई जिसमें दो कारणों से प्रवेश परीक्षा न कराने का निर्णय लिया गया, जिनमें से एक प्रमुख कारण फंड की कमी बताई गई। प्रशासन के अनुसार, पीएचडी प्रवेश परीक्षा आयोजित करने में लगभग ढाई करोड़ रुपये का खर्च आता है।
जेएनयू छात्रसंघ के संयुक्त सचिव वैभव मीणा ने कहा कि पीएचडी दाखिलों का सत्र निकट है और इस संबंध में अफवाहें फैल रही थीं कि जून में आयोजित होने वाले यूजीसी नेट के अंक मान्य नहीं होंगे। लेकिन दाखिला निदेशक से बात करने पर यह स्पष्ट हुआ कि ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है और प्रोस्पेक्टस में भी इस तरह की कोई बात शामिल नहीं है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें, जून में यूजीसी नेट देने वाले छात्र भी दाखिले के लिए पात्र होंगे।




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