
कर्नाटक के गृहमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों पर बुधवार, 21 मई 2025 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की। ED की टीम ने तुमकुरु और बेंगलुरु के बाहरी इलाकों में स्थित श्री सिद्धार्थ मेडिकल कॉलेज, श्री सिद्धार्थ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (तुमकुरु) और श्री सिद्धार्थ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (नेलमंगला, बेंगलुरु) में छापेमारी की। हालांकि, ED ने इस कार्रवाई के कारणों के बारे में आधिकारिक रूप से कोई बयान जारी नहीं किया है।
डॉ. जी. परमेश्वर, जो स्वयं श्री सिद्धार्थ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के संस्थापक सदस्य रहे हैं, ने इस छापेमारी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें इस कार्रवाई की जानकारी नहीं है और वे इसकी जांच करेंगे। उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने भी इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें विश्वास है कि डॉ. परमेश्वर किसी भी गलत काम में शामिल नहीं हैं और वे इस मामले में पूरी जानकारी मिलने के बाद अपनी प्रतिक्रिया देंगे।
यह घटना राज्य की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकती है, क्योंकि डॉ. परमेश्वर और उनकी पार्टी कांग्रेस के खिलाफ विपक्षी दलों द्वारा पहले भी केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए हैं। कर्नाटक के गृह मंत्री ने इससे पहले भी केंद्रीय जांच एजेंसियों, जैसे CBI और ED, के राजनीतिक हथियार के रूप में उपयोग होने की आशंका जताई थी। उन्होंने कहा था कि इन एजेंसियों को राजनीति से ऊपर उठकर काम करना चाहिए और उनका दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।
इस छापेमारी के बाद, राज्य की सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो सकता है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें इस कार्रवाई के बारे में जानकारी नहीं है और वे इसकी जांच करेंगे। वहीं, विपक्षी दलों ने इसे कांग्रेस सरकार के खिलाफ साजिश करार दिया है।
इस मामले की जांच के परिणाम आने तक, यह कहना मुश्किल है कि यह कार्रवाई किस दिशा में जाएगी। हालांकि, यह घटना राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ ला सकती है और इसके दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं।




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