
अखिल भारतीय लोकतांत्रिक छात्र संगठन (AIDSO) की कर्नाटक राज्य समिति ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि वह शासकीय डिग्री कॉलेजों में प्रवेश शुल्क में 5% की वृद्धि के निर्णय को तुरंत वापस ले।
एक प्रेस वक्तव्य में, एआईडीएसओ के दक्षिण कन्नड़ ज़िला संयोजक विनय चंद्र एस.वी. ने कहा कि उन्हें यह जानकारी मिली है कि छात्रों से वसूली गई राशि का उपयोग सरकारी कॉलेजों के विकास के लिए किया जाएगा।
उन्होंने सवाल किया, “फिर निजी कॉलेज और सरकारी कॉलेजों में क्या फर्क रह जाएगा? क्या यह सरकार की ओर से शासकीय कॉलेजों की आर्थिक जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने और उन्हें निजीकरण की दिशा में धकेलने की पहली कोशिश नहीं है?”
उन्होंने आगे कहा कि सरकार पहले से ही शिक्षा क्षेत्र को, खासकर उच्च शिक्षा को, बहुत कम अनुदान देती है। राज्य की कई विश्वविद्यालयों के पास तो सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन देने तक के लिए धन नहीं है।
उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि “राज्य की सात विश्वविद्यालयें बुनियादी सुविधाओं और शिक्षकों की कमी के कारण बंद होने की कगार पर हैं। जिन विश्वविद्यालयों की आय मुख्य रूप से छात्रों द्वारा दिए गए प्रवेश शुल्क पर निर्भर है, वहां पढ़ाई की बढ़ती लागत के कारण बड़ी संख्या में छात्र काम करने को मजबूर हैं ताकि वे अपनी डिग्री की फीस चुका सकें। ऐसे में 5% शुल्क वृद्धि का निर्णय गरीब और मध्यम वर्गीय छात्रों को स्थायी रूप से उच्च शिक्षा से वंचित कर देगा।”
उन्होंने सरकार से मांग की कि वह इस निर्णय को तुरंत रद्द करे और राज्य के विश्वविद्यालयों की वित्तीय संकट को दूर करने के लिए अतिरिक्त अनुदान प्रदान करे।




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