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NEET PG पर SC का बड़ा फैसला: मेडिकल कॉलेजों को पहले बतानी होगी फीस, सीट ब्लॉक पर लगेगी पेनल्टी

नीट पीजी (NEET PG) में सीट ब्लॉकिंग की बढ़ती शिकायतों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि यह सिर्फ एक अनैतिक चलन नहीं, बल्कि मेडिकल शिक्षा प्रणाली की गहरी खामियों को उजागर करता है। कोर्ट ने सभी प्राइवेट और डीम्ड यूनिवर्सिटियों को निर्देश दिया है कि वे काउंसलिंग शुरू होने से पहले अपनी संपूर्ण फीस संरचना को सार्वजनिक करें।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की मुख्य बातें:
फीस का खुलासा अनिवार्य: सभी यूनिवर्सिटियों को ट्यूशन फीस, हॉस्टल फीस, सिक्योरिटी डिपॉजिट और अन्य शुल्क काउंसलिंग से पहले घोषित करने होंगे।

केंद्रीकृत फीस रेगुलेशन सिस्टम: नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के अंतर्गत एक केंद्रीकृत प्रणाली बनाई जाएगी ताकि फीस निर्धारण में पारदर्शिता लाई जा सके।

सीट ब्लॉकिंग पर सख्त सजा: छात्रों की सिक्योरिटी डिपॉजिट जब्त की जाएगी, उन्हें भविष्य की NEET PG परीक्षाओं के लिए अयोग्य ठहराया जा सकता है, और कॉलेजों को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।

 काउंसलिंग कैलेंडर: ऑल इंडिया और राज्य स्तर की काउंसलिंग एक समान समय-सीमा में संचालित होगी ताकि दोहराव और सीट ब्लॉकिंग रोकी जा सके।

सीट अपग्रेड का विकल्प: काउंसलिंग के दूसरे राउंड के बाद छात्रों को बेहतर विकल्प मिलने की सुविधा होगी, लेकिन नए छात्रों के लिए सीट नहीं खोली जाएगी।

पारदर्शिता बढ़ाने के निर्देश: परीक्षा में प्रयुक्त रॉ स्कोर, उत्तर कुंजी और नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूला को सार्वजनिक करने के आदेश दिए गए हैं।

सीट ब्लॉकिंग: मेरिट के खिलाफ एक खतरा
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि सीट ब्लॉकिंग से मेडिकल सीटों की वास्तविक उपलब्धता का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे योग्य छात्रों को नुकसान होता है और चयन प्रक्रिया भाग्य आधारित हो जाती है। यह न केवल शैक्षणिक असमानता को बढ़ावा देता है, बल्कि मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता और विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिन्ह लगाता है।

फैसले की पृष्ठभूमि
यह निर्णय उत्तर प्रदेश सरकार और लखनऊ के डायरेक्टर जनरल मेडिकल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग की ओर से दायर याचिका पर आया है। याचिका में इलाहाबाद हाई कोर्ट के 2018 के उस फैसले को चुनौती दी गई थी जिसमें दो छात्रों को सीट ब्लॉकिंग के कारण मुआवजा देने और दोषियों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे।

यह फैसला न केवल मेडिकल शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करेगा, बल्कि भविष्य में योग्य छात्रों को उनके हक की सीट दिलाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

 

Asmita Sarkar

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