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बढ़ती फीस और कम स्टाइपेंड को लेकर पंजाब में MBBS छात्रों का प्रदर्शन, कहा- तत्काल कदम उठाए सरकार

हर साल हजारों छात्र डॉक्टर बनने का सपना लेकर मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लेते हैं, लेकिन पंजाब में यह सपना हर साल थोड़ा और धुंधला होता जा रहा है। कारण है – तेजी से बढ़ती मेडिकल फीस और बेहद कम स्टाइपेंड, जो न तो छात्रों की मेहनत का सम्मान करता है और न ही उनके भविष्य को सुरक्षित करता है।

सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC), अमृतसर के एमबीबीएस छात्रों और इंटर्न्स ने सोमवार, 26 मई 2025 को कॉलेज प्रशासन के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। उन्होंने उच्च पाठ्यक्रम शुल्क और न्यूनतम स्टाइपेंड को लेकर विरोध दर्ज कराया।

“हर साल 5% फीस बढ़ाना बंद हो और स्टाइपेंड बढ़ाया जाए”
डॉ. अर्चित बावा, अध्यक्ष, मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन, जीएमसी अमृतसर ने कहा, “हम इस लिए प्रदर्शन कर रहे हैं ताकि हर साल होने वाली 5 प्रतिशत फीस वृद्धि को रोका जा सके। साथ ही, जो स्टाइपेंड हमें इंटर्नशिप के दौरान मिलता है, वह बहुत कम है। इसे बढ़ाया जाना चाहिए।”

फीस में 77% की वृद्धि, लेकिन स्टाइपेंड वहीं का वहीं
डॉ. अर्चित ने बताया कि 2019 तक पंजाब में एमबीबीएस कोर्स की फीस लगभग ₹4.4 लाख थी। लेकिन 2025 तक इसमें 77% की वृद्धि हो चुकी है और अब यह ₹11.8 लाख हो गई है।

इसके उलट, इंटर्न्स को पिछले 5 वर्षों से ₹15,000 मासिक स्टाइपेंड ही मिल रहा है — यानी सिर्फ ₹500 प्रतिदिन।

उन्होंने यह भी बताया कि पड़ोसी राज्यों में फीस आधी है, लेकिन स्टाइपेंड दोगुना मिलता है। यह पंजाब के मेडिकल छात्रों के साथ सीधा अन्याय है।

शांतिपूर्ण मार्च के माध्यम से उठाई आवाज
यह प्रदर्शन OPD ब्लॉक, गुरु नानक देव अस्पताल, अमृतसर से शुरू होकर गेट नंबर 1, GMC अमृतसर तक शांतिपूर्ण मार्च के रूप में आयोजित किया गया।

सरकार से अब तक नहीं मिला कोई जवाब
7 मई 2025 को मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री, राज्यपाल, स्वास्थ्य मंत्री, मुख्य सचिव, मेडिकल शिक्षा निदेशक, बाबा फरीद यूनिवर्सिटी के कुलपति, और अमृतसर, पटियाला, फरीदकोट के GMC प्राचार्यों को पत्र भेजा था।

जब कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो उन्होंने 23 मई को दूसरा पत्र भेजा — पहली चिट्ठी का जवाब मांगते हुए। लेकिन अब तक कोई उत्तर नहीं मिला है।

गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों पर सीधा असर
छात्रों और इंटर्न्स ने सरकार से तत्काल कदम उठाने की अपील की है। उनका कहना है कि यह मुद्दा सिर्फ वर्तमान छात्रों का नहीं है, बल्कि उन हजारों गरीब और मध्यम वर्गीय छात्रों का है, जो डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं लेकिन आर्थिक बोझ से लड़ते हुए पीछे रह जाते हैं।

Asmita Sarkar

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