
क्वांटम विश्वविद्यालय में “एक सतत भविष्य के लिए दीर्घकालिक शिक्षाः एक मनोवैज्ञानिक, आर्थिक और भाषाई दृष्टिकोण” विषय पर आधारित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह शैक्षणिक कार्यक्रम भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) द्वारा प्रायोजित था।
इस संगोष्ठी में देशभर से आए शिक्षाविदों, विचारकों, शोधार्थियों, उद्योग विशेषज्ञों और छात्रों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य दीर्घकालिक एवं सतत शिक्षा के माध्यम से एक समावेशी और स्थायी शैक्षणिक ढांचे की कल्पना और उस पर विमर्श करना था।
संगोष्ठी का शुभारंभ विश्वविद्यालय के हार्मनी हॉल में हुआ। प्रातः 10:00 बजे विशिष्ट अतिथियों का औपचारिक स्वागत वीआईपी लॉन्ज में किया गया। 10:30 बजे मुख्य अतिथि को Martyr Wall पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के पश्चात मुख्य सभागार ले जाया गया, जहाँ कार्यक्रम की शुरुआत छात्रों द्वारा प्रस्तुत राष्ट्रगान से हुई। कार्यक्रम का संचालन ईशा मनकतला ने किया।
Quantum School of Business के निदेशक डॉ. मनीष श्रीवास्तव ने स्वागत भाषण में दीर्घकालिक शिक्षा को राष्ट्रीय विकास के लिए अत्यावश्यक बताते हुए इसकी भूमिका को रेखांकित किया। इसके बाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) विवेक कुमार ने अपने प्रेरक संबोधन में बताया कि सतत शिक्षा वैश्विक और स्थानीय स्तर पर सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों के समाधान की दिशा में कैसे प्रभावशाली भूमिका निभा सकती है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर दिनेश चंद्र शास्त्री रहे। उन्होंने अपने उद्बोधन में दीर्घकालिक शिक्षा के मनोवैज्ञानिक, आर्थिक और भाषाई पक्षों पर विस्तृत चर्चा की और इसे एक सतत समाज की नींव बताया। उन्होंने इस वैचारिक मंच की परिकल्पना के लिए क्वांटम विश्वविद्यालय और ICSSR की सराहना की।
यह संगोष्ठी शिक्षा क्षेत्र में दीर्घकालिक परिवर्तन की दिशा में एक सार्थक पहल के रूप में देखी गई, जिसमें विविध दृष्टिकोणों और विशेषज्ञ अनुभवों के आदान-प्रदान से समृद्ध चर्चा हुई।




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