
उत्तराखंड सरकार ने पहली कक्षा में प्रवेश की आयु सीमा में बदलाव कर अभिभावकों और स्कूलों को बड़ी राहत दी है। अब कक्षा 1 में दाखिला लेने वाले बच्चे की उम्र 1 जुलाई तक 6 साल पूरी होना अनिवार्य होगी। पहले यह सीमा 1 अप्रैल थी। इस संशोधन को “शिक्षा का अधिकार (संशोधन) नियमावली 2025” के तहत लागू किया गया है और इसकी अधिसूचना शुक्रवार को जारी कर दी गई।
पहले क्या था नियम?
अब तक कक्षा 1 में दाखिले के लिए बच्चे की उम्र 1 अप्रैल तक 6 साल पूरी होना जरूरी थी। इस कारण कई बच्चे सिर्फ कुछ सप्ताह या महीने की देरी से दाखिले से वंचित रह जाते थे, जिससे अभिभावकों को परेशानी होती थी। इस मुद्दे को लेकर राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पास शिकायतें भी पहुंचीं। आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने शिक्षा विभाग से नियमों पर पुनर्विचार करने को कहा था।
अब क्या है नया नियम?
अब 1 जुलाई तक 6 साल की उम्र पूरी करने वाले बच्चे कक्षा 1 में दाखिले के पात्र होंगे।इससे तीन महीने की अतिरिक्त छूट मिल गई है। यह बदलाव अभिभावकों की चिंताओं को दूर करने और स्कूलों में दाखिला संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है।
प्री-स्कूल में पढ़ रहे बच्चों को मिलेगी राहत
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जो बच्चे वर्तमान में प्री-स्कूल (नर्सरी, LKG, UKG) में पढ़ रहे हैं, उन्हें पहले की तरह कक्षा 1 में पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी जाएगी, भले ही वे 1 जुलाई तक 6 साल के न हों। इससे उनकी शिक्षा की निरंतरता बनी रहेगी।
भविष्य के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश
आगामी शैक्षिक सत्रों में सभी स्कूलों को निर्देशित किया गया है कि वे प्री-स्कूल में प्रवेश के समय ऐसी आयु सीमा निर्धारित करें, जिससे बच्चे कक्षा 1 में प्रवेश तक 6 वर्ष पूरे कर लें। यह व्यवस्था भविष्य में सभी विद्यालयों पर बाध्यकारी होगी।
यह कदम शिक्षा में समावेशिता, व्यवहारिकता और बच्चों की भलाई को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जिससे अब कोई बच्चा सिर्फ उम्र के कुछ दिनों के फर्क से स्कूल से वंचित न हो।




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