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अब 12वीं पास कोई भी सीख सकता है विदेशी भाषा, डीयू के SOL में बिना एंट्रेंस मिलेगा एडमिशन

दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (SOL) ने इस साल एक नई पहल की है, जिसके तहत अब 12वीं पास कोई भी व्यक्ति प्रतिष्ठित डीयू से विदेशी भाषाएं सीख सकता है—वो भी बिना किसी प्रवेश परीक्षा के।

यह पहली बार है जब डीयू-SOL ने आठ विदेशी भाषाओं में सर्टिफिकेट कोर्स लॉन्च किए हैं। इस पहल का लाभ खासकर उन छात्रों और वर्किंग प्रोफेशनल्स को मिलेगा, जो अपनी पढ़ाई या नौकरी के साथ-साथ विदेशी भाषा में दक्षता हासिल करना चाहते हैं।

CIFL के तहत शुरू हुए कोर्स
इन कोर्सेज की शुरुआत डीयू के SOL के अंतर्गत स्थापित सेंटर फॉर इंडियन फॉरेन लैंग्वेजेज (CIFL) द्वारा की गई है। इस साल इन भाषाओं में सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किए गए हैं, जबकि अगले शैक्षणिक सत्र से डिप्लोमा कोर्स भी शुरू किए जाएंगे।

ये 8 विदेशी भाषाएं होंगी उपलब्ध
विद्यार्थी और पेशेवर आठ विदेशी भाषाओं- जापानी, कोरियन, इटैलियन, स्पैनिश, फ्रेंच, जर्मन, मंदारिन (चीनी) और रूसी में से किसी भी एक या अधिक भाषा को सीखने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इन भाषाओं की वैश्विक मांग शिक्षा, व्यापार और रोजगार के लिहाज से तेजी से बढ़ रही है।

एडमिशन प्रक्रिया और तारीखें
इन कोर्सेस में दाखिला लेने के लिए उम्मीदवारों को 12वीं पास होना जरूरी है। सबसे खास बात यह है कि किसी भी कोर्स में प्रवेश के लिए एंट्रेंस एग्जाम नहीं लिया जाएगा—चयन मेरिट के आधार पर किया जाएगा।

ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तारीख: 12 जुलाई
पहली मेरिट लिस्ट जारी होगी: 17 जुलाई
काउंसलिंग और दाखिला प्रक्रिया: 18 से 20 जुलाई तक

पढ़ाई का तरीका और क्लास शेड्यूल
डीयू के अधिकारियों के अनुसार, इन कोर्सेज को हाइब्रिड मोड में पढ़ाया जाएगा—यानी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से। क्लासेस अधिकतर वीकेंड (शनिवार और रविवार) को रखी जाएंगी ताकि रेगुलर कॉलेज के छात्र और कामकाजी लोग भी इसमें भाग ले सकें।

सर्टिफिकेट कोर्स पूरा करने के बाद छात्र आगे डिप्लोमा प्रोग्राम के लिए भी नामांकन कर सकते हैं।

विशेषज्ञों की निगरानी में चलेंगे कोर्स
इन कोर्सेज की शैक्षणिक निगरानी दिल्ली विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ रोमांस लैंग्वेजेज और ईस्ट-एशियन स्टडीज के अनुभवी फैकल्टी द्वारा की जाएगी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से इन सभी कोर्सेज को मंजूरी भी मिल चुकी है।

मकसद: ग्लोबल करियर की राह आसान बनाना
इन पाठ्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य छात्रों को भाषाई दक्षता दिलाना और उन्हें अंतरराष्ट्रीय शिक्षा व करियर के नए अवसरों के लिए तैयार करना है।

अब विदेशी भाषा सीखने के लिए न प्रवेश परीक्षा देनी होगी, न ही रेगुलर कॉलेज जाना पड़ेगा—बस 12वीं पास होना काफी है।

Asmita Sarkar

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