
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने रैगिंग के खिलाफ बनाए गए नियमों की अनदेखी को गंभीरता से लेते हुए देशभर के 89 शैक्षणिक संस्थानों को ‘रैगिंग डिफॉल्टर’ घोषित किया है। इस सूची में IIT बॉम्बे, IIT खड़गपुर, IIM रोहतक, AMU जैसे देश के प्रमुख संस्थानों के नाम शामिल हैं।
किन संस्थानों ने नियमों का नहीं किया पालन?
UGC के अनुसार, इन संस्थानों ने अब तक छात्रों और संस्थान की ओर से एंटी-रैगिंग अंडरटेकिंग (घोषणा पत्र) जमा नहीं किए हैं, जो कि UGC के रैगिंग विरोधी विनियम, 2009 के तहत अनिवार्य है।
प्रमुख डिफॉल्टर संस्थान:
– IIT बॉम्बे, IIT खड़गपुर, IIT हैदराबाद, IIT पलक्कड़
– IIM बॉम्बे, IIM रोहतक, IIM तिरुचिरापल्ली
– एम्स रायबरेली, NID दिल्ली, NID आंध्र प्रदेश, NID हरियाणा
– अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU), इग्नू, नालंदा विश्वविद्यालय, ISI कोलकाता
– NIPER हैदराबाद (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च)
30 दिन में सुधार नहीं तो होगी सख्त कार्रवाई
UGC के सचिव डॉ. मनीष जोशी ने जानकारी दी कि इन संस्थानों को पहले भी कई बार एडवाइजरी, हेल्पलाइन कॉल और प्रत्यक्ष संवाद के माध्यम से नियमों का पालन करने के लिए कहा गया, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 30 दिनों के भीतर एंटी-रैगिंग अंडरटेकिंग जमा नहीं की जाती, तो फंडिंग, रिसर्च प्रोजेक्ट्स और मान्यता तक रद्द की जा सकती है।
UGC की एंटी-रैगिंग गाइडलाइंस क्या कहती हैं?
– हर छात्र को प्रवेश के समय और हर नए शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत में एक एंटी-रैगिंग अंडरटेकिंग जमा करनी होती है।
– संस्थान की जिम्मेदारी होती है कि वह सुनिश्चित करे कि सभी छात्रों से यह घोषणाएं ली गई हैं और उनका रिकॉर्ड सुरक्षित रखा गया है।
– यह नियम छात्रों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने और रैगिंग जैसी अमानवीय प्रथाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लागू किए गए हैं।
यदि संबंधित संस्थान समय रहते कार्रवाई नहीं करते, तो उन्हें गंभीर शैक्षणिक और वित्तीय दंड भुगतने पड़ सकते हैं।




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