
शैक्षणिक सत्र 2025-26 में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के पीएचडी कार्यक्रमों में दाखिला लेने वाले उम्मीदवारों को अब हॉस्टल डिजिटल सिस्टम के जरिए आवंटित किए जाएंगे। इसके लिए विश्वविद्यालय ने एक हॉस्टल अलॉटमेंट सॉफ्टवेयर तैयार किया है, जो पारदर्शी प्रक्रिया के तहत मेरिट लिस्ट जारी करेगा।
कैसे तय होगी हॉस्टल की मेरिट?
पीएचडी उम्मीदवारों को हॉस्टल आवंटन उनकी शैक्षणिक योग्यता या प्रवेश रैंक के आधार पर नहीं, बल्कि एक विशेष हॉस्टल पॉइंट/रैंक प्रणाली के जरिए किया जाएगा। यह प्रक्रिया पूरी तरह से सॉफ्टवेयर द्वारा संचालित होगी, जिससे भेदभाव की कोई संभावना नहीं रहेगी।
JNU ने हॉस्टल आवंटन के लिए तीन स्तर की प्राथमिकताएं निर्धारित की हैं।
किन्हें मिलेगी प्राथमिकता?
पहली प्राथमिकता केवल फुल-टाइम पीएचडी पाठ्यक्रम में दाखिला लेने वाले छात्रों को दी जाएगी। साथ ही वे उम्मीदवार जो दिल्ली के निवासी नहीं हैं, और जिनकी योग्यता परीक्षा दिल्ली से नहीं हुई है। ऐसे उम्मीदवार जिन्होंने परीक्षा भले ही दिल्ली से दी हो लेकिन वे दिल्ली निवासी नहीं हैं (जैसे किराये पर रहकर या हॉस्टल में रहकर पढ़े हैं), उन्हें भी प्राथमिकता मिलेगी। दिव्यांग उम्मीदवारों में से 80% को प्राथमिकता के आधार पर हॉस्टल मिलेगा।
दूसरी प्राथमिकता उन छात्रों को दी जाएगी जो जेएनयू से पढ़ चुके हैं, लेकिन जिनका संस्थान से दो से पांच वर्ष का अंतराल हो चुका है।
तीसरी प्राथमिकता में वे सभी उम्मीदवार होंगे जो पहली और दूसरी श्रेणी में नहीं आते।साथ ही जिन छात्रों के पास पहले से हॉस्टल सुविधा है, वे नए दाखिले के समय हॉस्टल के लिए पात्र नहीं माने जाएंगे।
JNU में 19 हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध
JNU में वर्तमान में कुल 19 हॉस्टल हैं, जहां छात्रों को रहने की सुविधा मिलती है। उम्मीदवारों को आवेदन फॉर्म में दिए गए पते में कोई बदलाव नहीं करने की अनुमति होगी, इसलिए फॉर्म भरते समय विशेष सावधानी बरतनी होगी।




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