
महाराष्ट्र के उन 1421 वरिष्ठ प्रोफेसरों को बड़ी राहत मिली है, जो पिछले 25 वर्षों से अपनी शैक्षणिक योग्यता की मान्यता का इंतजार कर रहे थे। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने आखिरकार 3 जुलाई को फैसला सुनाते हुए उन्हें NET और/या SET पात्रता से छूट देने की घोषणा की। ये सभी प्रोफेसर एमफिल डिग्रीधारी हैं।
यूजीसी के इस फैसले के बाद अब इन शिक्षकों के लिए सीनियर स्केल और सेलेक्शन ग्रेड में प्रमोशन का रास्ता भी खुल गया है।
1994 से 2009 के बीच उपेक्षित रहे एमफिल प्रोफेसर
मामले की पृष्ठभूमि बताते हुए महाराष्ट्र के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि “1993 से पहले और 14 जून 2006 से 11 जुलाई 2009 तक एमफिल डिग्री को शिक्षक पदों के लिए वैध माना जाता था। लेकिन 1994 से 2009 के बीच एमफिल करने वाले प्रोफेसरों को न तो NET/SET से छूट मिली और न ही प्रमोशन।”
इस स्थिति को लेकर राज्य सरकार ने केंद्र सरकार और यूजीसी से लगातार संवाद किया। अंततः राज्य के आग्रह पर एक बार की विशेष छूट देकर इन 1421 प्रोफेसरों को राहत दी गई।
“दशकों की नाइंसाफी अब खत्म” — पाटिल
मंत्री पाटिल ने कहा, “यह फैसला उन वरिष्ठ शिक्षकों को न्याय दिलाता है, जिन्होंने वर्षों तक बिना किसी मान्यता के शिक्षा क्षेत्र में सेवा की। अब वे एमफिल की डिग्री प्राप्त करने की तिथि से प्रमोशन के पात्र माने जाएंगे।”
रिक्त पदों की भरती में तेजी, 788 शिक्षण और 2242 गैर-शिक्षण पदों को मंजूरी
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मौके पर कहा कि राज्य के सरकारी विश्वविद्यालयों और सहायता प्राप्त कॉलेजों में रिक्त पदों की भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी। नई शिक्षा नीति के तहत 105 शिक्षण पद और 1 शिक्षक समकक्ष पद को लक्ष्मीनारायण नवीन प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में स्वीकृति दी गई है। तकनीकी विश्वविद्यालय के लिए 8 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता मंजूर की गई है। साथ ही, 788 शिक्षण और 2242 गैर-शिक्षण पदों को भरने की मंजूरी भी दी गई है।
फडणवीस ने कहा कि यह कदम राज्य की उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने की दिशा में बड़ा परिवर्तन लाएगा।




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