
भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को यमन में दी जाने वाली फांसी की सजा को रोकने के लिए अब एक संभावित आखिरी प्रयास शुरू हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दायर याचिका पर सुनवाई को मंजूरी दे दी है और अटॉर्नी जनरल को भी सुनवाई में शामिल होने को कहा गया है। अदालत ने मामला 14 जुलाई को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
निमिषा को यमन में एक यमनी नागरिक महदी की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया है और उसे 16 जुलाई को फांसी दी जा सकती है। याचिकाकर्ता के वकील का कहना है कि इसे कूटनीतिक तरीके से हल किया जा सकता है — जैसे कि पीड़ित परिवार को ब्लड मनी (रक्त-पैसा) देकर सजा से माफी मिल सकती है।
38 वर्षीय निमिषा प्रिया, केरल के पलक्कड़ जिले की रहने वाली हैं। वह 2008 में नर्स के रूप में यमन गई थीं और बाद में महदी के साथ मिलकर एक क्लिनिक शुरू किया। लेकिन 2017 में महदी की मौत के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और 2020 में मौत की सजा सुनाई गई। यमन की अदालत ने 2023 में उनकी अंतिम अपील खारिज कर दी थी।
निमिषा पर आरोप है कि उन्होंने महदी को बेहोशी की दवा की ज्यादा खुराक देकर मार डाला, जबकि उनका कहना है कि वह सिर्फ अपना पासपोर्ट वापस लेने के लिए महदी को बेहोश करना चाहती थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि महदी ने उनसे शारीरिक हिंसा की, पैसे और पासपोर्ट छीन लिया था।
जनवरी 2024 में, यमन के हूती प्रशासन की सुप्रीम पॉलिटिकल काउंसिल ने भी फांसी की सजा को मंजूरी दे दी थी।
इस बीच, निमिषा को बचाने में लगे संगठनों और परिवार ने महदी के परिजनों को 10 लाख डॉलर की ब्लड मनी की पेशकश की है, लेकिन उनका भविष्य अब इस बात पर टिका है कि क्या महदी का परिवार उसे माफ करता है।
निमिषा की मां भी 2024 से यमन में मौजूद हैं, और अपनी बेटी की जिंदगी बचाने के लिए दिन-रात कोशिशें कर रही हैं।




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