
एक समय था जब बच्चों से पूछा जाता था – “बड़े होकर क्या बनना है?” और जवाब में आता – इंजीनियर, वैज्ञानिक या डॉक्टर। लेकिन आज वही सवाल पूछें तो जवाब से पहले अक्सर एक डर झलकता है – “मैथ्स तो बहुत मुश्किल है!”
गणित को लेकर यह डर धीरे-धीरे बच्चों की सोच में घर करता जा रहा है, और यही डर उनके सीखने की क्षमता को भी प्रभावित कर रहा है।
एनसीईआरटी की रिपोर्ट ने किया खुलासा
हाल ही में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की एक रिपोर्ट में यह सामने आया है कि तीसरी कक्षा के अधिकतर छात्र बुनियादी गणित जैसे जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसे सरल कौशल भी सही तरीके से नहीं कर पा रहे हैं।
यह केवल बच्चों की शैक्षणिक स्थिति पर सवाल नहीं उठाता, बल्कि माता-पिता और शिक्षकों दोनों के लिए एक चेतावनी है।
कहाँ चूक रहे हैं बच्चे?
गणितीय भाषा की समझ कमजोर: कई बच्चों को सवालों की भाषा समझ में नहीं आती, जिससे वे उसे हल नहीं कर पाते।
दो अंकों की संख्याओं में भी गलती: बुनियादी सवालों में बार-बार ग़लतियाँ हो रही हैं, जो साफ संकेत देती हैं कि नींव कमजोर है।
समस्या की जड़ें क्या हैं?
रट्टा आधारित पढ़ाई
बच्चों को जवाब तो रटवा दिए जाते हैं, लेकिन उन्हें यह समझ नहीं आता कि वे क्या और क्यों कर रहे हैं।
‘मैथ्स मुश्किल है’ – यह सोच
अक्सर पैरेंट्स और शिक्षक खुद ही कह देते हैं कि “मैथ्स आसान नहीं है”, जिससे बच्चे पहले से ही इसे कठिन मान लेते हैं।
अभ्यास की कमी
गणित एक ऐसा विषय है जिसमें नियमित अभ्यास बेहद जरूरी है। अभ्यास न होने पर बच्चे जल्दी पिछड़ जाते हैं।
टेक्नोलॉजी पर निर्भरता
कैलकुलेटर, मोबाइल ऐप्स और गेम्स ने बच्चों की मानसिक गणना की आदत को कम कर दिया है।
क्या किया जा सकता है? समाधान की दिशा में कदम
कॉन्सेप्ट क्लियर करना जरूरी
बच्चों को केवल उत्तर रटवाने के बजाय उन्हें यह सिखाना जरूरी है कि गणना कैसे और क्यों की जाती है।
खेल और कहानियों के ज़रिए गणित सिखाएं
अगर गणित को कहानियों और मज़ेदार गतिविधियों से जोड़ा जाए तो बच्चे डरने की बजाय इसे पसंद करने लगते हैं।
घर में शामिल करें गणितीय गतिविधियाँ
जैसे सब्ज़ी खरीदते समय बच्चे से जोड़-घटाव करवाएं या घर का बजट समझाएं।
शिक्षकों को दें बेहतर प्रशिक्षण
शिक्षकों को यह समझने की ट्रेनिंग दी जाए कि बच्चे कहाँ अटकते हैं और उन्हें उनकी गति से कैसे सिखाया जाए।
गणित से डर बच्चों की गलती नहीं, बल्कि हमारी शिक्षा व्यवस्था और सोच में सुधार की जरूरत है। अगर हम शुरुआत स्कूल और घर से करें, तो बच्चों में आत्मविश्वास भी बढ़ेगा और गणित को लेकर डर भी कम होगा।




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