
उत्तराखंड सरकार ने राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में भगवद् गीता को शैक्षणिक पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय लिया है। यह फैसला मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान लिया गया। इस फैसले का असर राज्य के 17,000 से अधिक सरकारी स्कूलों में जल्द ही दिखाई देगा।
सरकार ने इस कार्य को NCERT को सौंप दिया है, जो पाठ्यक्रम में गीता को सम्मिलित करने की प्रक्रिया को अमल में लाएगा।
मुख्यमंत्री धामी का बयान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “भगवद् गीता एक पवित्र ग्रंथ है जिसमें भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया ज्ञान जीवन भर उपयोगी होता है। हमने यह निर्णय लिया है कि उत्तराखंड के सभी स्कूलों में गीता पढ़ाई जाएगी। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।”
इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दिल्ली में हुई मुलाकात का ज़िक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में चारधाम यात्रा, आदि कैलाश और कैलाश मानसरोवर यात्रा जैसी योजनाओं को ऐतिहासिक सफलता मिली है, और राज्य सरकार को इसमें लगातार मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है।
शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत का बयान
राज्य के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने जानकारी दी कि शिक्षा विभाग ने NCERT को निर्देश दिया है कि वह भगवद् गीता और रामायण को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की रूपरेखा तैयार करे।
जब तक यह औपचारिक रूप से लागू नहीं होता, तब तक स्कूलों में दैनिक प्रार्थना सभाओं में गीता और रामायण के श्लोकों का पाठ कराया जाएगा।
यह निर्णय भारतीय संस्कृति और मूल्यों को स्कूली शिक्षा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि इससे छात्रों के नैतिक और आध्यात्मिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।




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