
भारतीय पारंपरिक गुरुकुल प्रणाली में शिक्षित छात्र अब आधुनिक तकनीकी संस्थानों जैसे IIT से शोध कार्य कर सकेंगे। यह ऐतिहासिक पहल केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत “इंडियन नॉलेज सिस्टम डिवीजन” और “केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय” के सहयोग से शुरू की गई है। इस योजना का नाम है — सेतुबंध स्कॉलर स्कीम, जो पारंपरिक और आधुनिक शिक्षा के बीच एक सार्थक पुल का कार्य करेगी।
किसे मिलेगा रिसर्च का मौका?
यह योजना उन पारंपरिक विद्वानों के लिए तैयार की गई है जिन्होंने कम-से-कम पाँच वर्षों तक किसी मान्य गुरु या गुरुकुल के अंतर्गत भारतीय ज्ञान, दर्शन, भाषा या कला की गहन शिक्षा प्राप्त की है। ऐसे 18 पारंपरिक विषयों की पहचान की गई है, जिनमें शोध किया जा सकता है।
इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि औपचारिक डिग्री के बिना भी, यदि कोई विद्यार्थी पारंपरिक प्रणाली से शिक्षित है और अपनी विद्वत्ता प्रमाणित करता है, तो वह मान्यता प्राप्त डिग्री के साथ शोध कार्य करने का पात्र होगा।
किन IITs में मिलेगा अवसर?
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने बताया कि यह योजना पारंपरिक भारतीय ज्ञान और आधुनिक शैक्षणिक संस्थानों के बीच एक सेतु की तरह कार्य करेगी। नामांकन भले ही केंद्रीय विश्वविद्यालय में होगा, लेकिन छात्रों का शोध-कार्यक्षेत्र प्रमुख IITs में होगा।
वर्तमान में जिन संस्थानों से साझेदारी हुई है, वे हैं:
– IIT हैदराबाद
– IIT मंडी
– IIT रुड़की
इसके अलावा, AICTE के अंतर्गत इंडियन नॉलेज सिस्टम डिवीजन (IKS) भी इस योजना में सहयोग कर रहा है।
25 साल पहले हुआ था ऐसा प्रयास
कुलपति वरखेड़ी ने बताया कि 25 वर्ष पूर्व आईआईआईटी हैदराबाद में इसी तरह का एक प्रयास किया गया था, जिसमें वे स्वयं लाभार्थी रहे हैं। उन्होंने कहा, “मुझे वहाँ अध्ययन से एक नई दृष्टि और सोच मिली थी। यही अनुभव अब अगली पीढ़ी के पारंपरिक विद्वानों को भी मिलेगा।”
सेतुबंध स्कॉलर स्कीम उन छात्रों के लिए एक क्रांतिकारी पहल है जो पारंपरिक शिक्षा में पारंगत हैं और अब आधुनिक रिसर्च की दुनिया में कदम रखना चाहते हैं। यह भारतीय शिक्षा व्यवस्था में समावेश और नवाचार का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।




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