
देश में छात्रों द्वारा आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं और मानसिक स्वास्थ्य संकट को गंभीरता से लेते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सभी शैक्षणिक संस्थानों के लिए देशव्यापी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ये निर्देश तब तक लागू रहेंगे जब तक केंद्र सरकार इस मुद्दे पर कोई ठोस कानून या नियामक ढांचा नहीं बना लेती।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि भारत में छात्र आत्महत्या को रोकने के लिए खासकर स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों में किसी प्रभावी कानून की कमी है।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य निर्देश:
– हर शैक्षणिक संस्थान को मानसिक स्वास्थ्य नीति अपनानी होगी, जो ‘उम्मीद’, ‘मनोदर्पण’ और राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम नीति से प्रेरित हो।
– यह नीति संस्थान की वेबसाइट और सूचना पट्टों पर स्पष्ट रूप से उपलब्ध होनी चाहिए और हर साल अपडेट की जानी चाहिए।
– 100 या उससे अधिक छात्रों वाले संस्थानों में कम से कम एक प्रशिक्षित काउंसलर, मनोवैज्ञानिक या सामाजिक कार्यकर्ता की नियुक्ति अनिवार्य होगी।
– छोटे संस्थानों को जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ सहायता के लिए बाहरी मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों से जुड़ना होगा।
– छात्रावासों में छत, बालकनी और पंखों जैसी जगहों पर आत्महत्या निवारक सुरक्षा उपकरण लगाना अनिवार्य होगा।
– कोचिंग संस्थानों को छात्रों को प्रदर्शन के आधार पर बैच में बांटना, सार्वजनिक रूप से अपमानित करना या अव्यावहारिक लक्ष्य देना प्रतिबंधित किया गया है।
– जाति, वर्ग, लिंग, धर्म, विकलांगता या यौन पहचान के आधार पर उत्पीड़न, यौन हिंसा और रैगिंग जैसे मामलों के लिए गोपनीय और सुलभ शिकायत निवारण तंत्र बनाना अनिवार्य होगा।
– शिकायतकर्ताओं के खिलाफ प्रतिशोध की किसी भी कार्रवाई पर “जीरो टॉलरेंस नीति” लागू होगी।
– मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में विशेषज्ञ की तुरंत सहायता सुनिश्चित करनी होगी और छात्र की शारीरिक व मानसिक सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।
– किसी संस्थान की लापरवाही से यदि कोई छात्र आत्महत्या करता है तो संस्थान को कानूनी व प्रशासनिक रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
कोचिंग हब्स पर विशेष निगरानी
कोर्ट ने कोटा, जयपुर, दिल्ली, चेन्नई, मुंबई और हैदराबाद जैसे प्रमुख कोचिंग हब्स को विशेष सतर्कता के साथ इन निर्देशों को लागू करने को कहा है।
राज्यों को नियम बनाने के आदेश
सभी राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों को दो महीने के भीतर निजी कोचिंग संस्थानों के लिए पंजीकरण, छात्र सुरक्षा और शिकायत निवारण व्यवस्था लागू करने का आदेश दिया गया है।
राष्ट्रीय टास्क फोर्स और केंद्र से जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने आत्महत्या और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे पर एक राष्ट्रीय टास्क फोर्स गठित करने का निर्देश भी दिया है, जो उच्च शिक्षण संस्थानों में निगरानी और सुधार का काम करेगी।
केंद्र सरकार को 90 दिनों में इस संबंध में कार्यान्वयन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को होगी।
विशाखापट्टनम के NEET छात्र की मौत की जांच अब CBI करेगी
सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें NEET की तैयारी कर रहे 17 वर्षीय छात्र की संदिग्ध मौत की CBI जांच से इनकार किया गया था। अब यह मामला CBI के हवाले होगा और जांच की निगरानी एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा की जाएगी।




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