
सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय (SPPU) में पिछले दो वर्षों से बंद पड़ी यूजीसी मान्यता प्राप्त UPSC और MPSC स्पेशल बैच को फिर से शुरू करने की मांग को लेकर छात्र संगठनों के एक गठबंधन ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
6 अगस्त, बुधवार को कॉम्पिटिटिव एग्जामिनेशन सेंटर (CEC), नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI), डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर पोस्ट-ग्रेजुएट स्टूडेंट्स असोसिएशन (DAPSA) और महाराष्ट्र रिपब्लिकन पार्टी स्टूडेंट्स फ्रंट के प्रतिनिधियों ने कुलपति डॉ. सुरेश गोसावी को एक ज्ञापन सौंपते हुए इस स्पेशल बैच को तत्काल बहाल करने की मांग की।
क्या बंद किया गया था?
पहले इस स्पेशल बैच के तहत UPSC और MPSC परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए प्रत्येक में 52 सीटें उपलब्ध थीं, जिनमें से 20 सीटें अनुसूचित जाति (SC) और 10 सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) के छात्रों के लिए आरक्षित थीं। लेकिन वर्ष 2022 से यह बैच बंद पड़ा है।
इसकी जगह विश्वविद्यालय ने इस वर्ष “ऐड-ऑन बैचेस” शुरू की हैं, जिनमें UPSC और MPSC के लिए केवल 40-40 सीटें ही उपलब्ध हैं। छात्र संगठनों का आरोप है कि आरक्षण की सीटें घटा दी गई हैं, और साथ ही फीस संरचना भी भेदभावपूर्ण बना दी गई है।
वर्तमान में आरक्षित वर्ग के छात्रों को ₹7,500, जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों को ₹30,000 फीस देनी पड़ रही है।
छात्रों का विरोध
इस मुद्दे पर NSUI के राज्य सचिव अक्षय कांबले ने Free Press Journal से बात करते हुए कहा: “UGC द्वारा मान्यता प्राप्त UPSC और MPSC स्पेशल बैच को बिना किसी देरी के बहाल किया जाना चाहिए। अगर प्रशासन ने इस पर कार्रवाई नहीं की, तो NSUI पूरे विश्वविद्यालय में एक बड़ा और उग्र आंदोलन शुरू करेगा। हम ऐसे प्रशासन को स्वीकार नहीं करेंगे जो छात्रों के अधिकारों की अनदेखी करता हो।”
प्रदर्शनकारी छात्र दीपक सुतार ने कहा: “हम ऐसी किसी भी नीति का कड़ा विरोध करते हैं जो बहुजन और दलित छात्रों को पीछे धकेलती है। SC-ST छात्रों के साथ किया जा रहा यह भेदभाव शर्मनाक और अस्वीकार्य है। विश्वविद्यालय को सामाजिक न्याय की भावना के अनुरूप इस स्पेशल बैच को तुरंत पुनः शुरू करना चाहिए।”




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