
विश्व संस्कृत दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने पिछले दस वर्षों में संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। उन्होंने संस्कृत को “ज्ञान का अत्यंत प्राचीन स्रोत” बताते हुए कहा कि इसका प्रभाव जीवन के हर पहलू में देखा जा सकता है।
मोदी ने इस अवसर को संस्कृत सीखने और इसे लोकप्रिय बनाने में जुटे सभी लोगों के प्रयासों को सम्मान देने का अवसर बताया। यह दिवस हर साल ‘श्रावण पूर्णिमा’ के दिन मनाया जाता है।
प्रधानमंत्री ने सरकार की पहलें गिनाते हुए केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना, संस्कृत शिक्षण केंद्रों का विस्तार, विद्वानों को अनुदान, और प्राचीन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण जैसे कदमों का उल्लेख किया। उनके अनुसार, इन प्रयासों से असंख्य छात्रों और शोधकर्ताओं को लाभ मिला है।
उन्होंने याद दिलाया कि हिंदू महाकाव्यों समेत अनेक महान ग्रंथ संस्कृत में रचे गए हैं—एक ऐसी भाषा जो आज मुख्यतः धार्मिक कार्यों में प्रयुक्त होती है, लेकिन जिसकी प्रासंगिकता सदियों से बनी हुई है।




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