
केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अभ्यर्थियों की कमी को देखते हुए यूजीसी ने खाली सीटों को भरने के लिए नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत बीएचयू सहित सभी विश्वविद्यालय प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी बची हुई सीटों पर मेरिट के आधार पर छात्रों को दाखिला दे सकेंगे। यूजीसी सचिव प्रो. मनीष आर. जोशी द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि खाली सीटें न केवल संसाधनों की बर्बादी हैं, बल्कि उन छात्रों के अवसर भी छीन लेती हैं जो उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं, लेकिन किसी कारणवश प्रवेश से वंचित रह जाते हैं।
नई एसओपी के अनुसार, प्रवेश में सीयूईटी स्कोर प्राथमिक मानदंड रहेगा, लेकिन बीएचयू उन छात्रों को भी मौका दे सकेगा जिन्होंने शुरुआत में आवेदन नहीं किया था। विषय चयन में भी छूट दी जा सकती है। अगर सीयूईटी आवेदकों की सूची समाप्त होने के बाद भी सीटें खाली रहें, तो विश्वविद्यालय स्वयं प्रवेश परीक्षा आयोजित कर सकते हैं या संबंधित विभाग स्क्रीनिंग टेस्ट के जरिए दाखिले दे सकते हैं। पिछली कक्षाओं के अंकों की मेरिट भी आधार बन सकती है। यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि प्रक्रिया में पारदर्शिता और आरक्षण रोस्टर का पालन अनिवार्य होगा।
आवेदकों की कमी से जूझ रहे विश्वविद्यालय
बीएचयू और अन्य केंद्रीय व राज्य विश्वविद्यालय लंबे समय से कम पंजीकरण की समस्या का सामना कर रहे हैं। 2024 में सिर्फ बीएचयू में ही यूजी और पीजी की 4,000 से अधिक सीटें खाली रह गईं, जबकि सामान्य, मॉप-अप और स्पेशल राउंड आयोजित किए गए थे। लगातार पांच साल से प्रवेश कम होने पर बीएचयू ने इस साल 30 से अधिक पाठ्यक्रमों में 40–60% तक सीटें घटा दीं। अन्य विश्वविद्यालयों में भी खासकर स्नातक स्तर पर अभ्यर्थियों की भारी कमी देखी गई।




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