
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि लंबे समय से उपेक्षित पुरानी पांडुलिपियों और दस्तावेजों को अब “ज्ञान भारतम” योजना के तहत डिजिटल रूप में परिवर्तित कर भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जा रहा है।
79वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए उन्होंने देश की भाषाई विविधता की सराहना की। प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत की भाषाई विविधता अपार और अमूल्य है। हमने मराठी, असमिया, बंगाली, पाली और प्राकृत को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया है। हमारी भाषाएं जितनी समृद्ध होंगी, हमारी ज्ञान प्रणालियाँ उतनी ही मजबूत होंगी।”
उन्होंने आगे कहा कि डेटा युग में यह ज्ञान एक वैश्विक शक्ति है और हमें इसके विकास पर गर्व करना चाहिए। “हमने अतीत में इन पांडुलिपियों की उपेक्षा की, लेकिन अब ज्ञान भारतम योजना के माध्यम से इन्हें डिजिटल स्वरूप में बदलकर आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा रहा है,” उन्होंने जोड़ा।




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