
केंद्र सरकार के हालिया व्यापक मॉड्यूलर सर्वेक्षण (CMS) में सामने आया है कि देशभर में कुल नामांकन का 55.9% हिस्सा सरकारी स्कूलों में है। निजी गैर-सहायता प्राप्त (मान्यता प्राप्त) स्कूलों में यह आंकड़ा 31.9% है। ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों की हिस्सेदारी 66% है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह केवल 30.1% रह गई है।
शहरों के बच्चे ज्यादा ले रहे निजी कोचिंग
सर्वे के अनुसार, देशभर के लगभग एक-तिहाई छात्र (27%) निजी कोचिंग ले रहे हैं। शहरी क्षेत्रों में यह अनुपात 30.7% है, जबकि ग्रामीण इलाकों में 25.5%।
कोचिंग पर शहरी छात्रों का खर्च ग्रामीणों से दोगुना
रिपोर्ट बताती है कि शहरी क्षेत्रों में प्रति छात्र निजी कोचिंग पर औसत वार्षिक खर्च 3,988 रुपये है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह केवल 1,793 रुपये है। उच्चतर माध्यमिक स्तर पर यह अंतर और ज्यादा बढ़ जाता है—शहरी क्षेत्रों में औसत 9,950 रुपये, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 4,548 रुपये।
95% छात्रों का खर्च घर से आता है
सर्वेक्षण में शामिल 95% छात्रों ने बताया कि उनकी पढ़ाई का मुख्य खर्च परिवार वहन करता है। सिर्फ 1.2% छात्रों ने कहा कि उन्हें सरकारी स्कॉलरशिप से सहायता मिलती है।
सर्वेक्षण का दायरा और पद्धति
यह CMS सर्वे राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS) के 80वें दौर का हिस्सा है। इसमें 52,085 परिवारों और 57,742 छात्रों से कंप्यूटर-सहायता प्राप्त व्यक्तिगत साक्षात्कार (CAPI) के जरिए जानकारी जुटाई गई।
शहरी छात्रों का कुल शिक्षा खर्च भी अधिक
सर्वे रिपोर्ट में बताया गया है कि सभी प्रकार के स्कूलों में छात्रों का सबसे अधिक खर्च पाठ्यक्रम शुल्क पर हुआ। औसतन प्रति छात्र यह खर्च 7,111 रुपये है। शहरी परिवारों में पाठ्यक्रम शुल्क पर वार्षिक औसत खर्च 15,143 रुपये रहा, जबकि ग्रामीण परिवारों में 3,979 रुपये। पाठ्यपुस्तकों, स्टेशनरी, वर्दी और परिवहन पर भी शहरी परिवार ग्रामीणों से कई गुना अधिक खर्च कर रहे हैं।
पिछले सर्वे से सीधी तुलना संभव नहीं
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इसे 2017-18 के 75वें दौर के NSS सर्वे से सीधे तुलना योग्य नहीं माना जा सकता, क्योंकि उस समय आंगनवाड़ी केंद्रों को पूर्व-प्राथमिक शिक्षा में शामिल नहीं किया गया था और निजी कोचिंग खर्च भी अलग से नहीं गिना गया था।




Add comment