
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने रेज़िडेंट डॉक्टरों के कार्य समय को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
यह कदम भारत के सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र सरकार और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) को दिए गए उस आदेश के बाद आया है, जिसमें देशभर के रेज़िडेंट डॉक्टरों की “अमानवीय कार्य परिस्थितियों” को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब मांगा गया है।
एम्स द्वारा जारी नोटिस में मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
– रेज़िडेंट डॉक्टरों को प्रतिदिन 12 घंटे से अधिक लगातार सक्रिय ड्यूटी (जिसमें कॉल ड्यूटी भी शामिल है) नहीं करनी होगी।
– उन्हें रोटेशन के आधार पर सप्ताह में एक अवकाश दिया जाएगा।
– जूनियर रेज़िडेंट डॉक्टरों का सामान्य कार्य समय 48 घंटे प्रति सप्ताह होगा, और किसी भी स्थिति में लगातार 12 घंटे से अधिक ड्यूटी नहीं होगी।
नोटिस में सभी सेंटर प्रमुखों (COCs) और विभागाध्यक्षों (HODs) को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि इन दिशा-निर्देशों का पालन सख्ती से किया जाए।
वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) की एक याचिका पर सुनवाई चल रही है, जिसमें देशभर के रेज़िडेंट डॉक्टरों पर थोपे गए “शोषणकारी और असंवैधानिक कार्य परिस्थितियों” को चुनौती दी गई है।
याचिका में मांग की गई है कि अदालत सभी सरकारी और निजी चिकित्सा संस्थानों को 1992 के ड्यूटी ऑवर्स निर्देश (जिसमें अधिकतम 12 घंटे प्रतिदिन और 48 घंटे प्रति सप्ताह की सीमा तय की गई है) का पालन करने का निर्देश दे, मानव मनोवैज्ञानिक और शारीरिक सीमाओं को ध्यान में रखते हुए रोस्टर तैयार किए जाएं और अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए निगरानी तंत्र स्थापित किया जाए।




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