
दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने आगामी छात्र संघ चुनावों को देखते हुए सभी कॉलेज प्राचार्यों को सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि कैंपस और उसके आसपास किसी भी तरह की सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने, पोस्टर-बैनर लगाने या सौंदर्य बिगाड़ने की अनुमति नहीं होगी। यह कदम दिल्ली हाईकोर्ट के आदेशों के अनुरूप उठाया गया है।
कॉलेज प्राचार्य बने “एंटी-डिफेसमेंट हेड”
27 अगस्त को जारी परिपत्र के अनुसार, प्रत्येक कॉलेज प्राचार्य अपने संस्थान के “एंटी-डिफेसमेंट हेड” होंगे। वे यह सुनिश्चित करेंगे कि दीवारों पर लिखाई, पोस्टर, बैनर या होर्डिंग्स परिसर के भीतर और आसपास कहीं न लगाए जाएँ।
हाईकोर्ट आदेश और नई समिति
यह दिशा-निर्देश 2018 के हाईकोर्ट आदेश पर आधारित हैं, जिसे 2024 में और सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया गया था। इसी क्रम में विश्वविद्यालय ने यूनिवर्सिटी कमेटी फॉर प्रिवेंशन ऑफ डिफेसमेंट ऑफ प्रॉपर्टी (UCPDP) का गठन किया है। इसमें विश्वविद्यालय के एस्टेट ऑफिसर प्रो. बिपिन कुमार तिवारी, वरिष्ठ फैकल्टी सदस्य, दिल्ली पुलिस, दिल्ली मेट्रो और नगर निगम के प्रतिनिधि शामिल हैं।
हर कॉलेज में निगरानी समिति अनिवार्य
निर्देशों के अनुसार, हर कॉलेज को एक समिति बनानी होगी जिसमें वरिष्ठ फैकल्टी सदस्य और स्थानीय थाना प्रभारी (SHO) शामिल होंगे। यह समिति चुनावी गतिविधियों पर नज़र रखेगी, संवेदनशीलता कार्यशालाएँ आयोजित करेगी और “वॉल्स ऑफ डेमोक्रेसी” बनाएगी, जहाँ तयशुदा स्थानों पर पोस्टर लगाने की अनुमति होगी।
उम्मीदवारों की जिम्मेदारी और शर्तें
नामांकन पत्र दाखिल करते समय उम्मीदवारों को लिखित घोषणा देनी होगी कि वे और उनके समर्थक किसी भी डिफेसमेंट गतिविधि में शामिल नहीं होंगे। नियम तोड़ने पर अयोग्यता की कार्रवाई की जाएगी।
8 अगस्त को जारी अधिसूचना के अनुसार:
– उम्मीदवारों को चुनावी बॉन्ड जमा करना होगा।
– छात्रों से दाखिले के समय एंटी-डिफेसमेंट शपथपत्र लिया जाएगा।
– प्रचार केवल “वॉल्स ऑफ डेमोक्रेसी” तक सीमित रहेगा।
– रैली, रोड शो, लाउडस्पीकर और शक्ति प्रदर्शन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे।
– प्रचार मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से करना होगा।
– चुनाव के दौरान बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश वर्जित रहेगा। जरूरत पड़ने पर बायोमेट्रिक या फेस रिकग्निशन सिस्टम लगाया जा सकता है।
चुनाव कार्यक्रम और पाबंदियाँ
डीयू छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2025-26 के लिए 18 सितंबर को मतदान और 19 सितंबर को मतगणना होगी। पिछले वर्ष हाईकोर्ट ने चुनाव प्रचार में सार्वजनिक संपत्तियों पर पोस्टर लगाने के चलते वोटों की गिनती रोक दी थी और साफ-सफाई के बाद ही गिनती कराई गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि उद्देश्य “सज़ा देना नहीं, बल्कि सुधार लाना” है।
नए नियमों के तहत डुसु पदाधिकारी केवल तीन तय विश्वविद्यालय स्थलों पर आधिकारिक कार्यक्रम कर सकेंगे। उन्हें विश्वविद्यालय गेस्ट हाउस या मेंटेन किए गए छात्रावास बुक करने की अनुमति नहीं होगी। विश्वविद्यालय का कहना है कि इन प्रावधानों का उद्देश्य साझा स्थानों की मर्यादा बनाए रखना, जवाबदेही सुनिश्चित करना और जिम्मेदार विश्वविद्यालय संस्कृति को बढ़ावा देना है।




Add comment