
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि दूरस्थ शिक्षा से हासिल की गई इंजीनियरिंग डिग्री को सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया में मान्यता नहीं दी जा सकती।
यह फैसला मोटर वाहन निरीक्षक (एमवीआई) चयन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुनाया गया। मामला 2008 का है, जब जम्मू-कश्मीर सेवा चयन बोर्ड (जेकेएसएसबी) ने एमवीआई (तकनीकी) के चार पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। लेकिन योग्यता मानदंडों में विवाद और बदलावों के चलते भर्ती प्रक्रिया लंबे समय तक अटकी रही।
इस प्रक्रिया में उम्मीदवार चग्गर सिंह बिल्लोरिया को विनायका मिशन यूनिवर्सिटी से दूरस्थ शिक्षा के जरिए प्राप्त एमटेक डिग्री के आधार पर अतिरिक्त अंक दिए गए थे। अदालत ने इस डिग्री को अमान्य मानते हुए उनके अंक रद्द कर दिए। इसके परिणामस्वरूप मेरिट सूची में रमनदीप सिंह को बढ़त मिल गई।
उच्च न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय के 2018 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि इंजीनियरिंग की दूरस्थ शिक्षा की डिग्री तभी मान्य हो सकती है जब उम्मीदवार अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) द्वारा आयोजित विशेष परीक्षा पास करे।
जस्टिस विनोद चटर्जी कौल और जस्टिस संजय धर की खंडपीठ ने रमनदीप सिंह की योग्यता पर उठाए गए सभी संदेहों को खारिज कर दिया और उनके चौधरी मोटर्स से मिले अनुभव प्रमाणपत्र को भी सही ठहराया।
इससे पहले, बिल्लोरिया ने इस मामले को लेकर कैट (CAT) में भी याचिका दायर की थी, जहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली थी।




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