
दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस कॉलेज ने “भारतीय दृष्टिकोण से इतिहास का पुनर्निर्माण” शीर्षक से एक विशेष परियोजना शुरू की है। इसका उद्देश्य लोगों को अपने परिवार, समाज और स्थानीय क्षेत्र का इतिहास लिखने के लिए प्रेरित करना है, ताकि भारतीय इतिहास को औपनिवेशिक नजरिए से हटाकर स्वदेशी दृष्टि से समझा जा सके।
पहल की मुख्य विशेषताएं
वार्षिक राष्ट्रीय प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी, जिसमें प्रतिभागियों को कम से कम 5,000 शब्दों के शोध-आधारित निबंध प्रस्तुत करने होंगे।
दो विषयों पर फोकस होगा:
1. पारिवारिक और सामुदायिक इतिहास – बड़े रिश्तेदारी और वंश परंपरा से जुड़ी कहानियां।
2. गांव, कस्बे या शहर का इतिहास – जिसमें शहरी विस्तार में शामिल गांव भी शामिल हैं।
प्रविष्टियां नौ महीने तक स्वीकार की जाएंगी और मूल्यांकन भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विद्वानों की समिति द्वारा किया जाएगा।
मधु किश्वर का दृष्टिकोण
मिरांडा हाउस की पूर्व छात्रा और शिक्षाविद मधु किश्वर, जिन्होंने अपने माता-पिता की स्मृति में किश्वर मेमोरियल ट्रस्ट (KMT) की स्थापना की है और इस पहल को वित्तपोषित कर रही हैं, ने कहा: “अपनी जड़ों से अनभिज्ञ समाज कभी प्रामाणिक राष्ट्रीय इतिहास नहीं लिख सकता। भविष्य की रूपरेखा बनाने के लिए हमें सहस्राब्दियों पुरानी ज्ञान परंपरा से अपने अतीत को पुनः प्राप्त करना होगा।”
उद्घाटन समारोह में, जहां लगभग 200 छात्र और शिक्षक उपस्थित थे, किश्वर ने अपने परिवार की कहानियां साझा कीं और वंशावली संरक्षण की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज अधिकांश लोग अपने दादा-दादी से आगे की पीढ़ियों के नाम भी नहीं जानते, जो इस प्रयास की आवश्यकता को दर्शाता है।
प्रो. बिजयालक्ष्मी नंदा का वक्तव्य
कॉलेज की प्राचार्या प्रो. बिजयालक्ष्मी नंदा ने इस पहल को “विद्वानों और नागरिकों के लिए ऐतिहासिक शोध में योगदान देने तथा राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में शामिल होने का मूल्यवान अवसर” बताया।
उद्देश्य और महत्व
यह कार्यक्रम केवल शिक्षाविदों तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी खुला है। पारिवारिक दस्तावेजों, लोककथाओं और स्थानीय स्मृतियों के आधार पर इतिहास का ऐसा संग्रह तैयार करना इसका लक्ष्य है, जो औपनिवेशिक दृष्टिकोण से परे वास्तविकताओं को सामने लाए और सामुदायिक जुड़ाव को मजबूत करे।




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