Edinbox Hindi

NEET परीक्षा में बदलाव की तैयारी ! पेन एंड पेपर से CBT मोड में एग्जाम कराने की योजना

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG में जल्द ही सुधारों की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) इन सुधारों के रोडमैप पर काम कर रही है। पिछले दो वर्षों में नीट परीक्षा को लेकर कई तरह के सवाल उठते रहे हैं, और इन्हीं मुद्दों को देखते हुए अब मेडिकल प्रवेश परीक्षा में बदलाव की तैयारी की जा रही है। इसके तहत छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और विशेषज्ञों से राय ली जाएगी कि क्या नीट परीक्षा को पेन एंड पेपर मोड से कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) में बदलना संभव है।

नीट यूजी की व्यापकता
हर साल नीट यूजी में 23 लाख से अधिक उम्मीदवार आवेदन करते हैं, जिनमें उपस्थित होने की दर लगभग 96-97 प्रतिशत तक होती है। ऐसे बड़े स्तर की परीक्षा को ऑनलाइन मोड में लाने पर छात्रों और अन्य स्टेकहोल्डर्स का फीडबैक बहुत महत्वपूर्ण होगा।

सुधार की योजना
एनटीए पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठा रहा है:
– आधार-आधारित प्रमाणीकरण और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन को पूरी तरह लागू करना।
– रीयल-टाइम वीडियो निगरानी और सुरक्षित परीक्षा केंद्रों का विस्तार।
– फीडबैक प्रक्रिया MyGov प्लेटफॉर्म पर लाइव कर छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और संस्थानों से सुझाव मांगना।

एनटीए और शिक्षा मंत्रालय अकेले कोई फैसला नहीं ले सकते। नीट से संबंधित हर बदलाव के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय की मंजूरी भी आवश्यक होगी, क्योंकि स्वास्थ्य मंत्रालय देश में मेडिकल एडमिशन प्रक्रिया देखता है और एनटीए परीक्षा आयोजित करता है।

नीट क्वेश्चन पेपर और पैटर्न में बदलाव
MBBS और BDS जैसे कोर्सेस के लिए नीट का क्वेश्चन पेपर पैटर्न और रिजल्ट विश्लेषण भी किया जा रहा है। खास तौर पर यह देखा जा रहा है कि अगर नीट को इंजीनियरिंग एग्जाम की तरह CBT मोड में किया जाए, तो इसके क्या प्रभाव होंगे। वर्तमान में नीट एक ही दिन, एक ही शिफ्ट में पेन एंड पेपर मोड में आयोजित होती है, जबकि CBT मोड में इसे कई शिफ्ट में लिया जा सकता है।

ऑनलाइन मोड में परीक्षा होने से प्रश्नपत्रों की छपाई, परिवहन और स्टोरेज में जोखिम समाप्त हो जाते हैं। एनटीए के एक अधिकारी के अनुसार, नीट अभी भी अकेली बड़ी राष्ट्रीय परीक्षा है जो पेन एंड पेपर मोड में होती है। एनटीए ने इंजीनियरिंग और यूनिवर्सिटी एग्जाम में लाइव वीडियो निगरानी का प्रोजेक्ट पहले ही शुरू किया है।

पिछली चुनौतियाँ
2025 में नीट में आधार-बेस्ड बायोमेट्रिक प्रणाली पूरी तरह सफल नहीं हो पाई थी। एनटीए सूत्रों के अनुसार लॉजिस्टिक्स एक चुनौती है, क्योंकि सुरक्षित परीक्षा केंद्र चुनना कठिन होता है।

नीट परीक्षा में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद शिक्षा मंत्रालय ने उच्च-स्तरीय राधाकृष्णन समिति का गठन किया था। समिति ने कई सिफारिशें दी थीं, जिनमें सुरक्षित केंद्रों का निर्माण, वेरिफिकेशन प्रक्रिया में गड़बड़ी रोकने के उपाय और डिजिटल पहचान जांच शामिल हैं।

Asmita Sarkar

Add comment

Recent posts

Most popular

Most discussed