
विदेश में पढ़ने का सपना हर साल हजारों भारतीय छात्र देखते हैं। लेकिन नए देश में पहुंचकर सुरक्षित आवास खोजना, स्थानीय संस्कृति में ढलना और घर से दूर जीवन बसाना आसान नहीं होता। मेरठ के सौरभ अरोड़ा ने जब खुद यह मुश्किल झेली, तो उसी चुनौती को एक अवसर में बदल दिया — और दुनिया के लाखों छात्रों के लिए ‘घर से दूर, एक घर’ (Home Away from Home) की अवधारणा को साकार कर दिखाया।
120 देशों के छात्रों के लिए बनाया ‘University Living’ पोर्टल
सौरभ अरोड़ा ने 2015 में अपने सह-संस्थापक मयंक माहेश्वरी के साथ मिलकर ‘यूनिवर्सिटी लिविंग’ (University Living) की शुरुआत की। यह एक ऐसा वैश्विक प्लेटफॉर्म है जो छात्रों को उनके कॉलेज या विश्वविद्यालय के पास सुरक्षित और प्रमाणित आवास उपलब्ध कराता है।
सिर्फ 10 वर्षों में— यह प्लेटफॉर्म 640 से अधिक शहरों, 5,500 विश्वविद्यालयों, और 65,000 सुरक्षित संपत्तियों से जुड़ चुका है। अब तक 1.20 करोड़ से अधिक छात्र इस मंच के ज़रिए आवास पा चुके हैं।
मेरठ से शुरू हुआ सफर, बना वैश्विक मिशन
सौरभ अरोड़ा ने 2003 में सेंट मेरीज़ एकेडमी, मेरठ से 12वीं पास की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) से स्नातक किया और फिर इंफोसिस व इंडियाबुल्स में दो वर्ष तक काम किया। एमबीए के दौरान उन्हें गुरुग्राम से नॉटिंघम ट्रेंट यूनिवर्सिटी (यूके) के एक्सचेंज प्रोग्राम में हिस्सा लेने का मौका मिला — और वहीं से उनकी उद्यमशील यात्रा की शुरुआत हुई।
विचार की शुरुआत यूके के होटल रूम से हुई
यूके पहुंचकर सौरभ को सबसे बड़ी समस्या आवास को लेकर हुई। उन्हें एक महीने तक होटल में रहना पड़ा। यहीं उन्हें एहसास हुआ कि यह परेशानी सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि दुनिया भर के छात्रों की साझा समस्या है। उन्होंने अपने मित्र मयंक माहेश्वरी से इस पर चर्चा की— और इसी बातचीत से जन्म हुआ ‘University Living’ की संकल्पना का।
सिर्फ आवास नहीं, पूरी यात्रा को बनाया आसान
आज ‘University Living’ सिर्फ एक हाउसिंग प्लेटफॉर्म नहीं रहा, बल्कि छात्रों की विदेश यात्रा का ऑल-इन-वन समाधान बन चुका है। इस एक ही मोबाइल ऐप पर छात्रों को फ्लाइट और वीज़ा सहायता, एयरपोर्ट ट्रांसफर, सिम कार्ड और इंश्योरेंस, फॉरेक्स (विदेशी मुद्रा) सेवाएँ और गारंटर सहायता मिलती हैं— यानी विदेश जाने वाले छात्र अब एक क्लिक में अपनी पूरी तैयारी पूरी कर सकते हैं।
कई देशों में फैली टीम और अधिग्रहण से बढ़ती पहुंच
कंपनी में अब 300 से अधिक कर्मचारी काम कर रहे हैं, जो भारत के अलावा यूके, यूएस, ऑस्ट्रेलिया, आयरलैंड और मलेशिया में स्थित हैं। 2024 में ‘यूनिवर्सिटी लिविंग’ ने यूके की ‘स्टूडेंट टेनेंट’ (Student Tenant) कंपनी का अधिग्रहण किया, जिससे उन्हें 10,000 अतिरिक्त बेड, 1,000 मकान मालिक और 5 लाख नए छात्रों तक पहुंच मिली। हाल ही में कंपनी ने ‘Uninist Model’ भी लॉन्च किया है, जो छात्र आवास और विश्वविद्यालय साझेदारी का एक नया चरण है।
विश्वास, पारदर्शिता और सुरक्षा — पहचान बनी सफलता की कुंजी
सौरभ का मानना है कि शुरुआत में सबसे बड़ी चुनौती थी— सही मकान मालिकों और विश्वसनीय प्रॉपर्टीज़ का चयन करना। धीरे-धीरे छात्रों में विश्वास, पारदर्शिता और सुरक्षा की पहचान बनने लगी, जो आज कंपनी की सबसे बड़ी पूंजी है। मेरठ के लालकुर्ती निवासी विजय कुमार अरोड़ा के पुत्र सौरभ अब नोएडा में रहते हैं, उनका लंदन कार्यालय सक्रिय है, और उन्हें दुबई की नागरिकता भी प्राप्त है।
वैश्विक सराहना और सामाजिक पहलें
हाल ही में कंपनी ने ₹2 करोड़ की ग्लोबल स्कॉलरशिप प्रोग्राम शुरू की है, जिसके तहत मेधावी और मेहनती छात्रों को आवास लागत में राहत दी जा रही है। ‘University Living’ को कई प्रतिष्ठित मंचों पर सम्मान मिल चुका है, जैसे— इकोनॉमिक टाइम्स Power of Ideas, फोर्ब्स, CNBC, और बिज़नेस स्टैंडर्ड। सौरभ का कहना है, “हम सिर्फ घर नहीं देते, बल्कि छात्रों की पूरी यात्रा को आसान बनाते हैं।”
मेरठ के सौरभ अरोड़ा ने साबित कर दिया कि एक समस्या से जन्मी सोच, दुनिया भर के लाखों युवाओं की ज़िंदगी बदल सकती है। उनकी पहल ‘University Living’ आज शिक्षा, उद्यमिता और नवाचार का ऐसा संगम है, जिसने “घर से दूर, एक घर” को हकीकत बना दिया है।




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