
भारत की यूनिवर्सिटीज़ में पढ़ने वाले 35% से अधिक छात्रों का कहना है कि स्टार्टअप शुरू करने की राह में मेंटरशिप की कमी सबसे बड़ी बाधा है। यह खुलासा बीएमएल मुंजाल यूनिवर्सिटी की नई रिपोर्ट में हुआ है, जिसका शीर्षक है — “Youth Entrepreneurship and Start-up Governance: Guiding the Next Generation of Leaders Towards Stability and Success”।
नई पीढ़ी जिम्मेदार और महत्वाकांक्षी
यह अध्ययन देशभर की यूनिवर्सिटीज़ के 1,000 छात्रों और 200 उद्योग विशेषज्ञों (जिनमें फाउंडर्स, CXOs, निवेशक और स्टार्टअप इकोसिस्टम विशेषज्ञ शामिल हैं) पर आधारित है। रिपोर्ट के अनुसार, आज की युवा पीढ़ी न केवल महत्वाकांक्षी है, बल्कि पारदर्शिता और विश्वास पर आधारित जिम्मेदार उद्यम बनाने के लिए भी उत्सुक है।
छात्रों के सामने प्रमुख चुनौतियां
करीब तीन-चौथाई छात्रों ने कहा कि वे भविष्य में अपना वेंचर शुरू करना चाहते हैं — यह संकेत है कि उद्यमिता अब एक मुख्यधारा का करियर विकल्प बन चुकी है।
रिपोर्ट के मुताबिक —
– 35% छात्रों ने मेंटरशिप की कमी को सबसे बड़ी चुनौती बताया।
– 24% ने कानूनी और वित्तीय मार्गदर्शन की कमी का जिक्र किया।
– 22% छात्रों ने फंडिंग को लेकर चिंता जताई।
– 13% को असफलता का डर सबसे बड़ी बाधा लगा।
– जबकि 7% छात्रों को पढ़ाई और स्टार्टअप के बीच संतुलन कठिन लगा।
गवर्नेंस: स्थिरता की नई कुंजी
रिपोर्ट के अनुसार, पहले जिसे केवल अनुपालन का बोझ समझा जाता था, वही गवर्नेंस अब स्टार्टअप्स की स्थिरता और विकास की कुंजी बन रही है। आधे से अधिक उद्योग विशेषज्ञों ने गवर्नेंस को “ग्रोथ इंजन” कहा। जबकि 33% विशेषज्ञों ने इसे युवा उद्यमियों की “सबसे कमजोर कड़ी” बताया।
जिन स्टार्टअप्स ने पारदर्शी रिपोर्टिंग, संरचित बोर्ड समीक्षा और नैतिक मानकों को अपनाया, उन्हें निवेशकों का ज्यादा भरोसा और समर्थन मिला। निवेशकों के लिए सबसे भरोसेमंद कारक रहे — पारदर्शिता, सामाजिक प्रभाव और फाउंडर की विश्वसनीयता।
यूनिवर्सिटीज़ की भूमिका और छात्रों की सोच
रिपोर्ट बताती है कि यूनिवर्सिटीज़ नई पीढ़ी के जिम्मेदार आंत्रप्रेन्योर्स तैयार करने में अहम भूमिका निभा रही हैं। लगभग 50% छात्रों ने कहा कि उनकी यूनिवर्सिटी उद्यमिता को बढ़ावा देने में मददगार है। 89% छात्रों ने पाठ्यक्रम में नैतिकता और वित्तीय जवाबदेही से जुड़े विषयों को शामिल करने का समर्थन किया।
लेकिन केवल 9.6% छात्रों ने मौजूदा इनक्यूबेशन प्रोग्राम्स को “बेहद प्रभावी” माना। यह दर्शाता है कि अकादमिक संस्थानों और उद्योग जगत के बीच गहरा सहयोग ज़रूरी है, ताकि मेंटरशिप और कौशल विकास की खाई को भरा जा सके।
“अब सफलता का मतलब है जिम्मेदारी से बढ़ना”
बीएमएल मुंजाल यूनिवर्सिटी की लीडरशिप समिट की चेयर जोली मसीह ने कहा— “इस साल की लीडरशिप रिपोर्ट बताती है कि आज के युवा उद्यमियों के लिए सफलता का अर्थ सिर्फ तेजी से बढ़ना नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से बढ़ना है। अगली पीढ़ी के यूनिकॉर्न्स नवाचार के साथ-साथ ईमानदारी, गवर्नेंस और वित्तीय अनुशासन पर आधारित होंगे। बतौर शिक्षक, हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस सोच को शुरुआती स्तर पर ही विकसित करें।”




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