
अमेरिकी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे भारतीयों छात्रों को लेकर यह पहली ऐसी गंभीर घटना थी, जिसमें कथित तौर पर प्रथम वर्ष के एक छात्र ने बीते मार्च में एक खतरनाक ऑनलाइन गेम खेलते समय अपनी जान ले ली थी। ऐसा समझा जाता है कि वह खतरनाक ऑनलाइन गेम “ब्लू व्हेल चैलेंज” था जिसे “आत्महत्या का खेल” भी कहा जाता है।
गौरतलब है कि मृतक 20 वर्षीय छात्र मैसाचुसेट्स विश्वविद्यालय में प्रथम वर्ष की पढाई कर रहा था। 8 मार्च को उसे मृत पाया गया था। ब्रिस्टल काउंटी डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी के प्रवक्ता ग्रेग मिलियोट ने कहा है कि इस प्रकरण की जांच “स्पष्ट आत्महत्या” के ही एक मामले रूप में की जा रही है। जबकि छात्र की मृत्यु को तब व्यापक रूप से एक हत्या के रूप में रिपोर्ट किया गया था। तब उसे बोस्टन विश्वविद्यालय का छात्र बताते हुए उसकी गलत पहचान दी गई थी। साथ ही कहा गया था कि उसके साथ लूट की गयी थी और उसका शव जंगल में एक कार में पाया गया था। हालांकि बाद में ‘बोस्टन ग्लोब’ अखबार ने छात्र की असली पहचान करते हुए उसका नाम भी उजागर कर दिया था।
दरअसल, “ब्लू व्हेल चैलेंज” एक ऑनलाइन गेम है जिसमें प्रतिभागियों को प्रदर्शन करने का साहस दिया जाता है, जो 50 स्तरों पर और अधिक कठिन हो जाता है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, इस खेल को खेलते हुए उपरोक्त छात्र की दो मिनट तक सांसें अटकी रहीं थी।
उल्लेखनीय है कि साल 2017 में इस गेम के लॉन्च होने के बाद भारत सरकार ने इस खेल पर प्रतिबंध भी लगाना चाहा था, लेकिन तब इसके बजाय एक विस्तृत सलाह पर विचार किया गया। आईटी मंत्रालय ने जारी सलाह में कहा था, “ब्लू व्हेल गेम (आत्महत्या गेम) आत्महत्या के लिए उकसाने वाला खेल है।”
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह गेम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खेला जाता है। इसमें एक प्रशासक और एक भागीदार शामिल होता है। व्यवस्थापक 50-दिन की अवधि के लिए प्रतिदिन एक कार्य सौंपता है। शुरुआत में कार्य काफी अहानिकर होते हैं, लेकिन अंतिम चरण में खुद को नुकसान पहुंचाने के साथ वे उत्तरोत्तर कठिन होते जाते हैं।




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