
दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), पूसा में आयोजित तीन दिवसीय पूसा कृषि विज्ञान मेले का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय कृषि को “विकसित कृषि–आत्मनिर्भर भारत” की दिशा में ले जाने वाले कई अहम सुधारों का रोडमैप सामने रखा।
मंत्री का संदेश स्पष्ट था—अब किसान का पैसा रोके रखने, एमएसपी खरीद में देरी, पेस्टिसाइड लाइसेंस की जटिलता और केसीसी लोन की धीमी प्रक्रिया जैसी पुरानी व्यवस्थाएं स्वीकार्य नहीं होंगी।
मेले के शुभारंभ के दौरान कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट, और IARI निदेशक डॉ. सी. एच. श्रीनिवास राव उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में वैज्ञानिक, प्रगतिशील किसान और संस्थानों के प्रतिनिधि इस उद्घाटन कार्यक्रम का हिस्सा बने।
केंद्रीय मंत्री ने किसानों को मंच की प्रथम पंक्ति में बैठाकर और एक दिव्यांग किसान की व्हीलचेयर स्वयं आगे लाकर यह संदेश दिया कि नीति-निर्माण का केंद्र केवल किसान ही है। कार्यक्रम में सात किसानों को IARI कृषि अध्येता पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया।
किसान का पैसा रोका तो देना होगा 12% ब्याज
कृषि सुधारों पर बोलते हुए मंत्री चौहान ने किसानों के भुगतान में देरी को सबसे गंभीर समस्या बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में किसी भी एजेंसी या राज्य सरकार द्वारा भुगतान रोके जाने पर 12% ब्याज देना होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार अपनी ओर से देरी नहीं करेगी और राज्य स्तर पर भुगतान रुकने पर केंद्र का हिस्सा सीधे किसान के खाते में भेजने का विकल्प तैयार किया जा रहा है।
कृषि यंत्रीकरण, ड्रिप इरिगेशन, पाली हाउस और ग्रीन हाउस जैसी तकनीकों पर दी जा रही सब्सिडी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र 18 से अधिक योजनाओं के माध्यम से राज्यों को संसाधन उपलब्ध कराता है, लेकिन यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि लाभ वास्तविक किसानों तक पहुँचे।
उन्होंने उदाहरण दिया कि एक जिले में 700 किसानों की सूची में नाम होने के बावजूद केवल 158 किसानों तक मशीनें पहुँचीं—इसलिए मजबूत मॉनिटरिंग सिस्टम को अनिवार्य सुधार बताया।
KVK बनेगा कृषि रिफॉर्म का कमांड सेंटर
कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) को मजबूत करने की घोषणा करते हुए मंत्री चौहान ने कहा कि KVK को जिले का “कृषि रिफॉर्म कमांड सेंटर” बनाया जाएगा।
इसकी भूमिका होगी नई किस्में, आधुनिक कृषि पद्धतियाँ और सफल मॉडल को गाँव-गाँव तक पहुँचाना और राज्य संस्थाओं के साथ तालमेल बेहतर करना। यह अनुसंधान और जमीनी कृषि के बीच एक अहम पुल होगा।
केसीसी लोन: 4% ब्याज पर ऋण, लेकिन देरी बर्दाश्त नहीं
मंत्री ने बताया कि आज लगभग 75% छोटे किसान किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) का लाभ ले रहे हैं और उन्हें प्रभावी 4% ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध है। लेकिन उन्होंने साफ कहा कि लोन जारी करने में देरी शून्य होनी चाहिए।
बैंकों और वित्तीय संस्थानों को निर्देश दिया गया कि किसान बिना अतिरिक्त औपचारिकताओं के समय पर ऋण प्राप्त कर सकें, ताकि साहूकारों पर निर्भरता खत्म हो।
पेस्टिसाइड लाइसेंस: लंबी प्रक्रिया अब नहीं चलेगी
पेस्टिसाइड लाइसेंस प्रणाली को पुरानी और जटिल बताते हुए मंत्री चौहान ने संकेत दिया कि इसे सरल, समयबद्ध और पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक लाइसेंस अटका रहने से अच्छी कंपनियां भी परेशान होती हैं, जबकि नकली और घटिया उत्पाद बाजार में पहुँचकर किसानों को नुकसान पहुंचाते हैं। नई व्यवस्था इसका समाधान करेगी।
MSP खरीद अब तीन महीने नहीं, सिर्फ एक महीने में
एमएसपी पर खरीदी को लेकर मंत्री चौहान ने बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि तीन महीने की मौजूदा समय-सीमा व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि किसान अपनी फसल इतने समय तक नहीं रोक सकता। उन्होंने राज्यों के साथ मिलकर ऐसी व्यवस्था बनाने की बात कही कि MSP खरीद एक महीने के भीतर पूरी कर ली जाए। इससे किसान को तुरंत लाभ मिलेगा और “एमएसपी के नाम पर बाद में खरीदी कर लाभ कमाने” की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी।
खाद पर 2 लाख करोड़ की सब्सिडी—क्या सीधे खाते में जाएगी?
केंद्र सरकार हर वर्ष लगभग 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी सिर्फ उर्वरकों पर देती है। इससे किसान को 2400 रुपये की वास्तविक लागत वाली यूरिया सिर्फ 265–270 रुपये में उपलब्ध होती है। मंत्री ने कहा कि इस बात पर भी विचार होना चाहिए कि यदि यह सब्सिडी सीधे डीबीटी के रूप में किसान के खाते में दी जाए तो किसान अपनी आवश्यकता अनुसार उर्वरक खरीद सकेगा। इससे सुनिश्चित होगा कि लाभ उसी किसान तक पहुँचे जो वास्तव में खाद खेत में डाल रहा है।
विकसित कृषि संकल्प अभियान: अप्रैल से फिर शुरू होगा बड़ा कैंपेन
आगे की रणनीति साझा करते हुए मंत्री ने “विकसित कृषि संकल्प अभियान” का उल्लेख किया। इसके तहत वैज्ञानिकों की टीमें गांवों में जाकर किसानों को नई शोध उपलब्धियों, कीट व रोग प्रबंधन, इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल और निर्यात योग्य किस्मों के बारे में सीधे जानकारी देंगी। यह अभियान खरीफ सीजन से पहले अप्रैल में चलाया जाएगा, ताकि किसान समय रहते बेहतर तकनीकों का उपयोग कर सकें।
पूसा कृषि विज्ञान मेला: किसानों का राष्ट्रीय महाकुंभ
केंद्रीय मंत्री ने मेले को देशभर के किसानों, वैज्ञानिकों और नीति-निर्माताओं का “महाकुंभ” बताया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ प्रदर्शनी नहीं, बल्कि ऐसा मंच है जहाँ प्रयोगशाला की शोध खेतों तक पहुँचती है और आधुनिक, विकसित और आत्मनिर्भर कृषि का रोडमैप तैयार होता है। उन्होंने IARI को अगले वर्ष इस मेले को और व्यापक रूप में आयोजित करने की सलाह दी।




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