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जामिया हमदर्द : मदरसों में मुख्यधारा की शिक्षा के भविष्य और चुनौतियां पर हुई चर्चा

जामिया हमदर्द (Jamia Hamdard) में मदरसा शिक्षा को लेकर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन व कार्यशाला का आयोजन किया गया। स्कूल ऑफ फेडरल स्टडीज़ के इस्लामिक अध्ययन विभाग द्वारा आयोजित इस सम्मेलन का उद्घाटन कुलपति प्रोफ़ेसर अफ़शार आलम ने किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि इस्लामी अध्ययन केंद्र दारुल उलूम देवबंद के रेक्टर मौलाना सुफ़ियान क़ासमी, विशिष्ट अतिथि मौलाना अलाउद्दीन नदवी और प्रोफ़ेसर एमिरिट्स प्रोफ़ेसर अख्तरूल वासे, जामिया मिल्लिया थे। 

प्रोफ़ेसर सऊद क़ासमी, धर्मिक शिक्षा विज्ञान अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ने अपने मुख्य उद्बोधन में वर्तमान में मदरसा शिक्षा और मदरसों के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया। साथ ही इस दिशा में समस्याओं और समाधान की तरफ़ भी इशारा किया। प्रबंध संस्थापक मौलाना सुफ़ियान क़ासमी ने विस्तार से इस बहुत ही अहम विषय पर अपने उद्गार व्यक्त किये। प्रोफ़ेसर अख्तरूल वासे ने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में अपने व्यापक अनुभवों को आलोचनात्मकता के साथ रखा। 

आयोजन की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रोफ़ेसर अफ़शार ने आयोजकों को बधाई देते हुए देश व दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आये अतिथियों, शोधकर्ताओं व विद्वानों का स्वागत किया। उन्होंने संस्थापक पद्मभूषण स्व हकीम अब्दुल हमीद को श्रद्धांजलि देते हुए रेखांकित किया कि हकीम साहब कितनी शिद्दत से मानवीकीय, धार्मिक शिक्षा आदि के छात्रों को मुख्यधारा में लाने के लिए प्रयासरत रहे। उन्होंने प्रतिबद्धता जताई कि उन्हें जो अवसर मिला है वो उनके ख़्वाबों और उनकी परम्पराओ के संरक्षण व प्रसार में सदैव तत्पर रहेंगे, धार्मिक दर्शन व विज्ञान के छात्रों के लिए मुख्यधारा की व्यावहारिक शिक्षा में दक्षता के रास्ते खोलने का प्रयास करेंगे। इस अवसर पर संकायाध्यक्ष प्रोफ़ेसर अजय सिंह और विभागध्यक्ष डॉ अरशद हुसैन ने भी संबोधित किया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ वारिस मज़हर मज़हरी ने किया और अंत मे धन्यवाद डॉ नजमुस सहर ने प्रस्तावित किया।

Asmita Sarkar

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