
दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) के महासचिव मोहम्मद गोलाम सरवर ने दिल्ली के मैदान गढ़ी स्थित साउथ एशियन यूनिवर्सिटी (SAU) परिसर का आज दौरा किया, जहां एसएयू के अधिकारियों और छात्रों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान यूनिवर्सिटी प्रेजिडेंट प्रो. के.के. अग्रवाल ने उन्हें विश्वविद्यालय के अब तक तक के सफर, नए शुरू किए गए कार्यक्रमों और भविष्य के विकास की योजनाओं की जानकारी दी।
सार्क महासचिव मोहम्मद सरवर ने अल्पकाल में हासिल की गई उपलब्धियों के लिए एसएयू की सराहना की, साथ ही मैदान गढ़ी स्थित इसके प्रभावशाली परिसर और बुनियादी ढांचे की विशेषताओं को भी रेखांकित किया। उन्होंने उल्लेख किया कि एसएयू यानी साउथ एशियन यूनिवर्सिटी, दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) के सबसे सफल प्रमुख प्रयासों में से एक है। उन्होंने साउथ एशियन यूनिवर्सिटी को दिए गए हर प्रकार के सहयोग और समर्थन के लिए भारत सरकार का आभार व्यक्त किया। साथ ही धन्यवाद किया कि भारत सरकार ने विश्वविद्यालय का नेतृत्व करने के लिए एक अनुभवी अकादमिक और दूरदर्शी प्रशासक को अध्यक्ष के रूप में नामित किया।
उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने और क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों के छात्रों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने में संस्थान द्वारा निभाई जा रही भूमिका पर भी प्रकाश डाला, साथ ही अधिक अंतःविषय पाठ्यक्रम शुरू करने का भी सुझाव दिया जो सार्क के सदस्य देशों के सामान्य हित में हो। सार्क महासचिव ने विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों और विभागों के डीन और अध्यक्षों से भी बातचीत की। साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालय को आगे ले जाने के लिए आवश्यक किसी भी सहायता की अपनी तरफ से पेशकश की।
बता दें कि साउथ एशियन यूनिवर्सिटी (SAU) एक एक अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय है, जिसे आठ सार्क देशों – अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका की सरकारों द्वारा संयुक्त रूप से स्थापित किया गया है। विश्वविद्यालय का परिसर नई दिल्ली के मैदानगढ़ी में स्थित 100 एकड़ की हरी-भरी भूमि पर फैला हुआ है। SAU ने शैक्षणिक वर्ष 2010 से अपना संचालन शुरू किया। सार्क देशों द्वारा स्थापित, वित्त पोषित और संचालित एसएयू में लगभग आधे छात्र भारत से हैं जबकि शेष अन्य सार्क देशों से। विश्वविद्यालय अध्ययन के सात क्षेत्रों में स्नातक, मास्टर और पीएचडी कार्यक्रम प्रदान करता है जिसमें अर्थशास्त्र, कंप्यूटर विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, कानूनी अध्ययन, गणित और समाजशास्त्र शामिल हैं।




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