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अतिरिक्त समय देने के बावजूद नहीं भरे जा सके दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के कॉलेजों में नॉन टीचिंग पद 

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी (UGC) ने दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के विभागों/कॉलेजों को ओबीसी विस्तार योजना के तहत गैर शैक्षणिक पदों को भरने के लिए 31 मार्च, 2023 तक का एक्सटेंशन दिया था, लेकिन विभागों/कॉलेजों के प्रिंसिपल इन पदों को फिर भी नहीं भर पाए। यूजीसी के चेयरमैन प्रो. एम. जगदीश कुमार के संज्ञान में पत्र के ज़रिये यह बात लाते हुए फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फॉर सोशल जस्टिस ने मांग की है क़ि यूजीसी दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलसचिव व सभी प्रिंसिपलों को सर्कुलर जारी कर 31 मई, 2025 तक इन पदों को भरने के लिए एक्सटेंशन दे और अगर इस बार कोई कॉलेज ओबीसी एक्सपेंशन के इन पदों को नहीं भरता है, तो उनकी ग्रांट बंद कर दे।     

गौरतलब है कि इससे पहले भी यूजीसी सात बार ओबीसी एक्सपेंशन के इन पदों को भरने के लिए एक्सटेंशन दे चुकी है लेकिन अधिकांश कॉलेजों ने इन पदों को अब तक नहीं भरा है। फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फॉर सोशल जस्टिस के चेयरमैन डॉ. हंसराज सुमन का कहना है कि कॉलेज प्रिंसिपलों ने यह स्वीकार किया है कि पिछले दो साल से शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया के चलते वे ओबीसी एक्सपेंशन के इन पदों को अभी तक नहीं भर पाए। प्रिंसिपलों का यह भी कहना है कि जब तक यूजीसी पुनः इन पदों को भरने संबंधी निर्देश नहीं देगी, वे इन पदों को नहीं भर पाएंगे। इसलिए फोरम मांग करता है कि ओबीसी एक्सपेंशन स्कीम ( ओबीसी विस्तार योजना ) के अंतर्गत इन पदों को भरने के लिए पुनः एक साल का एक्सटेंशन देते हुए 31 मई 2025 तक समय दिया जाए। 

डॉ. हंसराज सुमन ने बताया कि हर विभाग/कॉलेज में ओबीसी एक्सपेंशन की सीटें खाली पड़ी हुई है, लेकिन प्रिंसिपलों की मंशा इन्हें भरने की नहीं है। कारण, ओबीसी के उम्मीदवार की सेक्शन ऑफिसर, एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर, लाइब्रेरियन, एसपीएस, पीए, सीनियर असिस्टेंट, असिस्टेंट आदि पदों पर नियुक्ति होनी है परन्तु प्रिंसिपलों ने पहले से लोगों को इन पदों पर कॉन्ट्रैक्ट पर लगाया हुआ है। उन्होंने बताया कि गत वर्ष यूजीसी की अवर सचिव वीना मैनन ने इस संदर्भ में जानकारी देते हुए कहा था कि दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलसचिव व सभी महाविद्यालयों के प्रिंसिपलों को 5 अक्टूबर 2023 से हम कुल सात बार समय सीमा को आगे बढ़ाने का निर्देश दे चुके हैं। 

अब काफी समय व्यतीत हो जाने के बाद समय सीमा के विस्तार के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले महाविद्यालयों से प्रार्थना पत्र भेजे जा रहे हैं। यूजीसी ने यह भी जानकारी दी की ओबीसी एक्सपेंसन के पदों को भरने हेतु पुनः समय सीमा विस्तार के लिए शिक्षा मंत्रालय की संस्तुति के लिए इसे आगे भेज दिया गया है। फिलहाल कॉलेज के प्रिंसिपलों ने ओबीसी एक्सपेंशन के इन पदों का रोस्टर रजिस्टर तैयार किया हुआ, वे यूजीसी से सर्कुलर आने का इंतजार कर रहे हैं। 

डॉ. सुमन का कहना है कि जो कॉलेज ओबीसी एक्सपेंशन के पदों को नहीं भरते, उन कॉलेजों के प्रति यूजीसी को सख्त कार्यवाही करते हुए इनका अनुदान बंद कर देना चाहिए। उन्होंने यूजीसी से मांग की है कि जो कॉलेज ओबीसी एक्सपेंशन के पदों को नहीं भरते, उन कॉलेजों से ओबीसी ग्रांट का पैसा ब्याज सहित लौटने को कहा जाए।               डॉ. सुमन ने बताया कि ओबीसी एक्सपेंशन के सबसे ज्यादा पद दिल्ली सरकार के कॉलेजों में हैं। इन कॉलेजों के प्रिंसिपल गवर्निंग बॉडी का बहाना बनाकर पदों को भरने में रुचि नहीं ले रहे हैं जबकि पिछले दो साल से इन कॉलेजों में शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है। 

 डॉ. सुमन ने कॉलेजों के एक्टिंग व ऑफिसिएटिंग प्रिंसिपलों से मांग की कि यूजीसी द्वारा ओबीसी कोटे के स्वीकृत पदों को भरने संबंधी जो दिशा-निर्देश जारी किए थे, वे कॉलेज अपने यहाँ ओबीसी पदों को भरने के लिए जल्द से जल्द ट्रेंकेटिड गवर्निंग बॉडी से पास कराकर इन पदों के विज्ञापन निकालें। 

 

Asmita Sarkar

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