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एलपीयू के छात्रों ने ग्लोबल फ्यूचर फोरम में बिखेरी चमक, एआई स्मार्ट टैग से बढ़ाई ताज़ा फसलों की उम्र

LPU students shine at Global Future Forum, extend shelf life of fresh crops with AI smart tags

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) जालंधर के एमएससी फ्रूट साइंस के छात्र मेघा ठाकुर और निशिकांत यादव ने मलेशिया में आयोजित ग्लोबल फ्यूचर फोरम 2025 में अपनी नवाचार क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया। अंतरराष्ट्रीय मंच पर पेश किए गए उनके प्रोजेक्ट ने न केवल विशेषज्ञों का ध्यान खींचा, बल्कि यह भी साबित किया कि भारतीय युवा एग्रीटेक जैसी जरूरतमंद क्षेत्रों में ठोस समाधान देने की क्षमता रखते हैं।

फलों और सब्जियों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने वाला एआई स्मार्ट टैग 

दोनों छात्रों ने एक ऐसा एआई-आधारित स्मार्ट टैग विकसित किया है, जो फलों और सब्जियों को लंबे समय तक ताज़ा रखने में मदद करता है। यह टैग बागवानी उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए खासतौर पर डिजाइन किया गया है। भारत जैसे देशों में जहां भंडारण की कमी के कारण हर साल फसल का बड़ा हिस्सा खराब हो जाता है, ऐसे समाधान किसानों और बाजार दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकते हैं।

आईओटी सेंसर और एआई एल्गोरिदम का स्मार्ट संयोजन

इस रिसर्च का नेतृत्व एलपीयू के डॉ. प्रवीण वर्मा के मार्गदर्शन में हुआ। प्रोजेक्ट में एआई एल्गोरिदम को आईओटी आधारित सेंसरों के साथ जोड़ा गया है, जो तापमान, नमी (ह्यूमिडिटी) और एथिलीन गैस के स्तर जैसे महत्वपूर्ण कारकों की निरंतर निगरानी करते हैं। ये सभी तत्व फलों और सब्जियों के जल्दी खराब होने की मुख्य वजह होते हैं।

प्रो-चांसलर कर्नल डॉ. रश्मि मित्तल ने इस उपलब्धि पर छात्रों की सराहना करते हुए कहा कि वास्तविक इनोवेशन वही है जो लोगों और पर्यावरण—दोनों के लिए उपयोगी साबित हो।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नवाचार फिर बना आकर्षण

ग्लोबल फ्यूचर फोरम 2025 में दुनिया भर से युवा इनोवेटर्स अपने विचार प्रस्तुत करने पहुंचते हैं। इस मंच पर एलपीयू छात्रों की प्रस्तुति को भी काफी सराहना मिली। कई विशेषज्ञों ने माना कि इस तरह की तकनीक एग्रीकल्चर सप्लाई चेन में बड़ा बदलाव ला सकती है, खासकर उन देशों में जहां खराब होती फसलों के कारण भारी आर्थिक नुकसान होता है।

एग्रीटेक में भारत की मजबूत उपस्थिति

मेघा और निशिकांत की यह उपलब्धि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती एग्रीटेक क्षमता का प्रमाण है। यह न केवल तकनीकी प्रगति को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि भारतीय विश्वविद्यालयों के छात्र वास्तविक समस्याओं को समझकर उनके समाधान निकालने की दिशा में गंभीरता से काम कर रहे हैं। 

यह प्रोजेक्ट आने वाले समय में फूड लॉस कम करने, किसानों की आमदनी बढ़ाने और सप्लाई चेन को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है। 

एडइनबॉक्स टीम

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