
केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने महाराष्ट्र के Jalgaon में केला उत्पादक किसानों से बातचीत की और किसानों की आय बढ़ाने को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि “स्वर्ण नगरी” और “बनाना सिटी” के नाम से पहचाने जाने वाला जलगांव देश के बागवानी क्षेत्र में अहम भूमिका निभाता है और यहां के किसानों के लिए केंद्र सरकार एक व्यापक विकास योजना पर काम कर रही है।
200 करोड़ की लागत से बनेगा बनाना क्लस्टर
मंत्री ने बताया कि जलगांव में लंबे समय से लंबित बनाना क्लस्टर परियोजना को आखिरकार मंजूरी मिल गई है। करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की जा रही यह परियोजना किसानों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है।
इस क्लस्टर में गुड एग्रीकल्चर प्रैक्टिस, मैकेनाइजेशन, बायो-कंट्रोल, फ्रूट कवर, प्री-कूलिंग जैसी आधुनिक सुविधाएँ विकसित की जाएंगी। इसके साथ ही कोल्ड स्टोरेज, राइपनिंग चेंबर, रेफ्रिजरेटेड वैन और प्रोसेसिंग यूनिट जैसी अवसंरचना भी तैयार होगी।
सरकार MIDH और Agriculture Infrastructure Fund के तहत इन सुविधाओं पर सब्सिडी उपलब्ध कराएगी ताकि किसानों को सीधा लाभ मिल सके।
शहरों और खेतों के दाम में अंतर पर चिंता
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसानों को मिलने वाले दामों और शहरों में उपभोक्ताओं द्वारा चुकाई जाने वाली कीमतों के बीच भारी अंतर चिंता का विषय है। उन्होंने उदाहरण दिया कि कई बार किसान टमाटर जैसे उत्पाद बेहद कम दामों पर बेचने को मजबूर हो जाते हैं, जबकि शहरों में वही उत्पाद कई गुना महंगा बिकता है।
सरकार अब ऐसा तंत्र विकसित करने पर काम कर रही है जिससे इस मूल्य अंतर को कम किया जा सके और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले।
केला फसल के लिए MSP का विकल्प
चौहान ने माना कि केला जैसी शीघ्र खराब होने वाली फसलें MSP पर खरीदकर संग्रहित नहीं की जा सकतीं। इसी वजह से सरकार एक वैकल्पिक मॉडल पर विचार कर रही है, जिसके तहत यदि बाजार मूल्य बेहद कम हो जाए तो किसानों को लागत या तय मॉडल मूल्य और बाजार भाव के बीच का अंतर दिया जाए।
इस तरह के प्रयोग मिर्च और आम में पहले किए जा चुके हैं और ‘पीएम-आशा’ योजना के तहत भी नए मॉडल तैयार किए जा रहे हैं।
मिट्टी की गिरती सेहत पर चिंता, प्राकृतिक खेती पर जोर
उन्होंने अत्यधिक रासायनिक खाद और कीटनाशकों के उपयोग को लेकर चिंता जताई। उनके अनुसार, इससे मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन की कमी होती है, मित्र कीट नष्ट होते हैं और भूमि की उर्वरता घटती है।
चौहान ने किसानों से अपील की कि वे प्राकृतिक खेती को छोटे स्तर पर प्रयोग के रूप में शुरू करें। उन्होंने कहा कि सही तकनीक के साथ की गई प्राकृतिक खेती उत्पादन घटाती नहीं, बल्कि भूमि की क्षमता बढ़ाती है।
किसानों के सुझावों पर बनेगा बड़ा रोडमैप
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसानों की समस्याओं और सुझावों को ध्यान में रखते हुए एक व्यापक रोडमैप तैयार किया जाएगा। जलगांव के केले को वैश्विक बाजार में नई पहचान दिलाने के लिए भी केंद्र सरकार सभी जरूरी कदम उठाएगी।
उन्होंने भारतीय संस्कृति में सर्वजन हिताय की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य किसानों को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाना है।




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