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चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की बड़ी उपलब्धि, विकसित की सरसों की पहली हाइब्रिड किस्म

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की बड़ी उपलब्धि, विकसित की सरसों की पहली हाइब्रिड किस्म

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की बड़ी उपलब्धि, विकसित की सरसों की पहली हाइब्रिड किस्म

देश में तिलहन उत्पादन बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए Chaudhary Charan Singh Haryana Agricultural University ने सरसों की पहली हाइब्रिड किस्म आरएचएच 2101 विकसित की है। यह उपलब्धि न सिर्फ कृषि अनुसंधान में विश्वविद्यालय की मजबूत भूमिका को दर्शाती है बल्कि देश में तेल आयात कम करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है।

विश्वविद्यालय ने बताया कि यह हाइब्रिड किस्म सिंचित क्षेत्रों में समय पर बुवाई के लिए अत्यंत लाभदायक है और किसानों को अधिक पैदावार देने में सक्षम है। कुलपति प्रोफेसर बलदेव राज कंबोज ने वैज्ञानिकों की इस उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी और कहा कि यह किस्म किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने में मदद करेगी।

बेहतर पैदावार और व्यापक उपयोगिता

कुलपति प्रो. कंबोज के अनुसार यह किस्म हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, जम्मू और उत्तरी राजस्थान जैसे क्षेत्रों के लिए अत्यंत उपयुक्त है, जहां सिंचाई उपलब्ध है। हाइब्रिड किस्म को अखिल भारतीय समन्वित सरसों एवं राई अनुसंधान परियोजना के तहत तीन वर्षों तक परीक्षण के बाद जारी किया गया है।

आरएचएच 2101 28–30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक औसत उपज देने में सक्षम है। यह पुरानी किस्म आरएच 749 की तुलना में 14.5%, DMH-1 से 11% तथा प्राइवेट कंपनी की हाइब्रिड 45546 से करीब 8% अधिक पैदावार देती है। अधिक उत्पादन क्षमता इसे किसानों के लिए अत्यंत लाभप्रद बनाती है।

वैज्ञानिक टीम को लगातार सम्मान

विश्वविद्यालय के कुलपति ने बताया कि इस हाइब्रिड किस्म की उच्च उपज क्षमता और तेल की अधिक मात्रा के कारण यह किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय होगी। पिछले 12 वर्षों में विश्वविद्यालय की सरसों टीम को चार बार उत्कृष्ट कार्य के लिए ‘सर्वश्रेष्ठ केंद्र’ पुरस्कार मिल चुका है, जो उनकी निरंतर सफलता और समर्पण को दर्शाता है।

उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में भी वैज्ञानिक नई और उन्नत किस्में विकसित कर देश की तिलहन उत्पादन क्षमता को और बढ़ाने में योगदान देंगे।

आरएचएच 2101: अधिक तेल, अधिक दाने, अधिक शाखाएं

अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने बताया कि यह हाइब्रिड किस्म 142 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। इसकी शाखाएं अधिक होती हैं और प्रति फली दानों की संख्या भी अन्य किस्मों की तुलना में ज्यादा है, जिसके कारण कुल पैदावार भी अधिक मिलती है। इस किस्म के दानों में लगभग 40% तेल पाया गया है, जो इसे तेल उत्पादन के लिहाज से भी एक उत्कृष्ट विकल्प बनाता है।

तिलहन अनुसंधान में अग्रणी केंद्र

विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक अब तक सरसों और राई की 25 उन्नत किस्में तथा एक हाइब्रिड किस्म विकसित कर चुके हैं, जिनकी खेती कई राज्यों के किसान कर रहे हैं। हाइब्रिड किस्म आरएचएच 2101 के प्रजनक डॉ. राम अवतार ने बताया कि पिछले छह वर्षों में टीम ने विभिन्न परिस्थितियों के लिए पांच नई किस्में विकसित की हैं, जिनमें आरएच 725, आरएच 1424 और आरएच 1975 किसानों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय हैं। इनके बीजों की मांग अन्य राज्यों में भी लगातार बढ़ रही है।

कुल मिलाकर, आरएचएच 2101 न केवल उत्पादन बढ़ाने में बल्कि देश की तिलहन आत्मनिर्भरता को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।

Asmita Sarkar

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