भारत के 80% से अधिक छात्रों को चिंता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के टूल्स भले ही उनके काम जल्दी पूरा करने में मदद कर रहे हैं, लेकिन इनकी वजह से वे पढ़ाई के विषयों को गहराई से समझने और सीखने में पीछे रह सकते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, छात्र समय बचाने के लिए डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन जब पढ़ी हुई चीजों को लंबे समय तक याद रखने की बात आती है, तो वे पारंपरिक तरीकों को प्राथमिकता देते हैं। करीब 42% छात्र AI से तैयार किए गए सारांश की जगह छपी हुई अध्ययन सामग्री या अपने हाथ से लिखे नोट्स पसंद करते हैं। वहीं, केवल 17% छात्रों ने AI से तैयार सारांश को प्राथमिकता दी।
दूसरी ओर, युवा छात्रों को स्वचालित तकनीकों पर आधारित अर्थव्यवस्था में अपने करियर की संभावनाओं को लेकर काफी उम्मीदें हैं। सर्वे में शामिल तीन-चौथाई से अधिक छात्रों का मानना है कि AI जितने रोजगार खत्म करेगा, उससे अधिक नए करियर विकल्प पैदा करेगा। वहीं, 87% छात्रों को भरोसा है कि वे कार्यस्थल पर इन टूल्स का जिम्मेदारी से इस्तेमाल कर सकते हैं।
इसके अलावा, 92% छात्रों का मानना है कि उनका मौजूदा शैक्षणिक पाठ्यक्रम उन्हें भविष्य में रोजगार की जरूरतों के लिए पर्याप्त रूप से तैयार कर रहा है।
ये निष्कर्ष HP Futures 2026 रिपोर्ट में सामने आए हैं। इसे ग्लोबल लर्निंग काउंसिल और एजुकेशन लीडर्स फोरम के सहयोग से प्रकाशित किया गया है। इस व्यापक अध्ययन में 37 देशों के 6,000 से अधिक छात्रों को शामिल किया गया, जिनमें भारत के 758 छात्र भी थे। इसके अलावा, शिक्षा, सार्वजनिक नीति और कार्यबल विकास के क्षेत्र से जुड़े 58 अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और नेताओं के विचार भी इसमें शामिल किए गए।
AI के साथ रचनात्मकता और तार्किक सोच भी जरूरी
रिपोर्ट बताती है कि भारत के युवा अब यह समझने लगे हैं कि तकनीकी जानकारी के साथ-साथ मानवीय क्षमताओं को मजबूत बनाना भी जरूरी है। भविष्य के रोजगार के लिए सबसे महत्वपूर्ण कौशलों के बारे में पूछे जाने पर 52% छात्रों ने AI और डिजिटल तकनीक की समझ को सबसे अहम माना।
इसके बाद 48% छात्रों ने रचनात्मकता, 41% ने आलोचनात्मक सोच यानी किसी विषय का विश्लेषण करके सही निष्कर्ष निकालने की क्षमता और 36% ने संवाद तथा मिलकर काम करने के कौशल को महत्वपूर्ण बताया।
ये आंकड़े संकेत देते हैं कि भविष्य के कार्यस्थल पर केवल AI और डिजिटल टूल्स चलाना ही पर्याप्त नहीं होगा। नए विचार पैदा करने, जानकारी का सही विश्लेषण करने और दूसरों के साथ मिलकर काम करने की क्षमता भी अहम रहेगी।
HP के मुख्य वाणिज्यिक अधिकारी और HP Futures के अध्यक्ष डेविड मैकक्वेरी ने कहा कि तेजी से बदलती तकनीक के लिए युवाओं को तैयार करने की जिम्मेदारी शिक्षकों, नीति निर्माताओं और नियोक्ताओं की साझा है। उन्होंने जोर दिया कि शिक्षा व्यवस्था को छात्रों की उन बुनियादी क्षमताओं को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए, जो तकनीक में बदलाव के बावजूद लंबे समय तक उपयोगी बनी रहें।
HP में एजुकेशन बिजनेस एंड स्ट्रैटेजी के निदेशक एवं वैश्विक प्रमुख मयंक धींगरा ने कहा कि यह रिपोर्ट शुरुआती दौर में AI के प्रभाव के बीच पढ़ाई कर रहे युवाओं की स्थिति को समझने का महत्वपूर्ण अवसर देती है। उन्होंने कहा कि विषयों को केवल सतही तौर पर समझ पाने को लेकर छात्रों की चिंताओं को पाठ्यक्रम तैयार करने और शिक्षण संस्थानों में मूल्यांकन की व्यवस्था तय करने से जुड़े आगामी नीतिगत फैसलों में शामिल किया जाना चाहिए।




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