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IIT BHU में बनेगा फिजिकल AI और ऑटोनॉमस सिस्टम्स स्कूल, 2027 से शुरू हो सकता है BTech कोर्स

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT-BHU), वाराणसी में फिजिकल AI और ऑटोनॉमस सिस्टम्स के लिए एक नया स्कूल स्थापित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को वास्तविक दुनिया में काम करने वाली मशीनों, रोबोट और स्वचालित तकनीकों से जोड़ना है। इस पहल के जरिए ऐसी मशीनें विकसित करने पर ध्यान दिया जाएगा, जो अपने आसपास के वातावरण को समझ सकें, जानकारी के आधार पर फैसले ले सकें और उसके अनुसार काम कर सकें।

संस्थान से जुड़ी जानकारी के अनुसार, इस स्कूल में सेंसर, स्मार्ट मशीनों और रोबोटिक्स के साथ AI के इस्तेमाल पर काम किया जाएगा। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यहां 2027 से चार साल का BTech कार्यक्रम शुरू करने की योजना है। इसमें विद्यार्थियों को केवल कक्षा में पढ़ाने के बजाय प्रोजेक्ट के माध्यम से मशीनें बनाने और उनके काम करने के तरीके को समझने का अवसर मिलेगा।

उदाहरण के लिए, ऐसी मशीन विकसित करना जो किसी व्यस्त फैक्ट्री में लोगों और दूसरी वस्तुओं से टकराए बिना अपना रास्ता बना सके। इसी तरह, स्मार्ट खेती की ऐसी व्यवस्था तैयार करना जो फसलों की पहचान कर सके और उनकी जरूरत के अनुसार प्रतिक्रिया दे सके।

फिजिकल AI का मकसद केवल कंप्यूटर पर कोड लिखना नहीं है, बल्कि ऐसी तकनीक विकसित करना है जो वास्तविक दुनिया में मौजूद चीजों को पहचानकर उनके अनुसार काम कर सके।

IIT (BHU) ने 15 जुलाई 2026 को इस स्कूल की आधिकारिक घोषणा की थी। इसके बाद 18 जुलाई 2026 को संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर एक समन्वय समिति के गठन की जानकारी भी दी गई।

फिजिकल AI क्या है? जेनरेटिव AI से कितना अलग है?

अधिकतर विद्यार्थी AI को चैटबॉट, तस्वीरें बनाने वाले टूल, वॉयस असिस्टेंट और सवालों के जवाब देने वाले ऐप के जरिए जानते हैं। इस तरह के AI टूल मुख्य रूप से जानकारी को समझने, उसका जवाब देने या नई सामग्री तैयार करने का काम करते हैं। जेनरेटिव AI इसी तरह की तकनीक का एक उदाहरण है।

इसके विपरीत, फिजिकल AI आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को उन मशीनों से जोड़ता है जो वास्तविक दुनिया में काम करती हैं। ऐसी मशीनें अपने आसपास की चीजों को पहचान सकती हैं, परिस्थितियों का आकलन कर सकती हैं और जरूरत के अनुसार कार्रवाई कर सकती हैं।

इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है। कोई चैटबॉट आपको बता सकता है कि किसी वस्तु को कैसे उठाना चाहिए। लेकिन फिजिकल AI से लैस रोबोट उस वस्तु को पहचान सकता है, उसे उठाने का तरीका तय कर सकता है और अपने यांत्रिक हिस्सों की मदद से उसे उठा सकता है।

इस तकनीक में AI मॉडल के साथ सेंसर, कैमरे, मोटर और रोबोटिक सिस्टम का इस्तेमाल होता है। सेंसर और कैमरे आसपास के वातावरण से जानकारी जुटाते हैं। AI उस जानकारी को समझने और अगला कदम तय करने में मदद करता है। इसके बाद मशीन मोटर या दूसरे यांत्रिक हिस्सों के जरिए कार्रवाई करती है। कुछ प्रणालियां अपने काम के नतीजों से मिलने वाली प्रतिक्रिया के आधार पर अपने व्यवहार में सुधार भी कर सकती हैं।

फिजिकल AI का इस्तेमाल रोबोट, खुद चलने वाली कारों, फैक्ट्रियों में स्वचालित मशीनों और ऐसे अन्य सिस्टम में किया जा सकता है, जिन्हें बदलती परिस्थितियों के अनुसार काम करना होता है।

IIT BHU के फिजिकल AI स्कूल का उद्देश्य क्या है?

IIT (BHU) के अनुसार, इस स्कूल का उद्देश्य बुद्धिमान मशीनों, रोबोटिक्स और ऑटोनॉमस सिस्टम के विकास के लिए अलग-अलग तकनीकी विषयों को एक साथ लाना है। यहां AI को केवल सॉफ्टवेयर तक सीमित रखने के बजाय ऐसी तकनीक विकसित करने पर ध्यान दिया जाएगा, जो अपने आसपास की स्थिति को समझ सके, तर्क के आधार पर निर्णय ले सके, अनुभव से सीख सके और वास्तविक दुनिया में काम कर सके।

इसके लिए कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, कंट्रोल सिस्टम और रोबोटिक्स जैसे विषयों की जानकारी जरूरी होगी।

इन क्षेत्रों के विशेषज्ञ मिलकर ऐसी मशीनों पर काम कर सकते हैं, जो केवल सिद्धांत के स्तर पर बुद्धिमान न हों, बल्कि वास्तविक जरूरतों के अनुसार काम भी कर सकें। उदाहरण के लिए, किसी औद्योगिक रोबोट को अपने आसपास की वस्तुओं की पहचान करने के साथ-साथ सुरक्षित तरीके से काम करने और परिस्थितियों में बदलाव आने पर प्रतिक्रिया देने में सक्षम होना चाहिए।

यह पहल सॉफ्टवेयर और वास्तविक मशीनों को जोड़ने वाले AI अनुसंधान के बढ़ते महत्व को भी दिखाती है। हालांकि, स्कूल की स्थापना की घोषणा का अर्थ यह नहीं है कि इससे जुड़ी सभी शोध परियोजनाएं या सुविधाएं शुरू हो चुकी हैं। भविष्य में शुरू होने वाले पाठ्यक्रमों, प्रयोगशालाओं और शोध कार्यों की जानकारी संस्थान की ओर से जारी आधिकारिक सूचनाओं के आधार पर ही देखी जानी चाहिए।

IIT BHU में 2027 से शुरू हो सकता है फिजिकल AI का BTech कोर्स

18 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, IIT (BHU) 2027 सत्र से फिजिकल AI और ऑटोनॉमस सिस्टम्स में चार साल का BTech कार्यक्रम शुरू करने की योजना बना रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस पाठ्यक्रम में दाखिला JEE Advanced के माध्यम से होने की उम्मीद है। हालांकि, प्रवेश प्रक्रिया की अंतिम पुष्टि संस्थान की आधिकारिक प्रवेश अधिसूचना जारी होने के बाद ही की जा सकेगी।

इस कार्यक्रम में प्रोजेक्ट आधारित पढ़ाई पर जोर दिए जाने की बात कही गई है। विद्यार्थियों को मशीनों के निर्माण और उनके काम करने के तरीके को समझने के लिए व्यावहारिक काम करना होगा। पाठ्यक्रम में उद्योगों से जुड़ा अनुभव देने पर भी ध्यान दिया जा सकता है, जिससे विद्यार्थियों को वास्तविक समस्याओं पर काम करने और तकनीकी कौशल विकसित करने में मदद मिलेगी।

यह कोर्स उन विद्यार्थियों के लिए खास हो सकता है, जिन्हें कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के साथ मशीनें बनाने, इंजीनियरिंग की समस्याएं हल करने और नई तकनीक विकसित करने में रुचि है।

हालांकि, इच्छुक विद्यार्थियों को दाखिले की तैयारी करने से पहले IIT (BHU) की आधिकारिक सूचनाएं जरूर देखनी चाहिए। सीटों की संख्या, पात्रता, फीस, दाखिले की अंतिम प्रक्रिया और पाठ्यक्रम का विस्तृत ढांचा आधिकारिक घोषणा के बाद ही तय माना जाना चाहिए।

स्वास्थ्य, खेती और फैक्ट्रियों में कैसे उपयोगी हो सकता है फिजिकल AI?

फिजिकल AI का इस्तेमाल कई क्षेत्रों में नई संभावनाएं पैदा कर सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ मशीन की क्षमता, सुरक्षा, लागत और संबंधित क्षेत्र की जरूरतों पर निर्भर करेगा।

स्वास्थ्य सेवाएं: AI से लैस रोबोट डॉक्टरों को कुछ जटिल प्रक्रियाओं में सहायता दे सकते हैं। इनका इस्तेमाल मरीजों के पुनर्वास और कुछ दोहराए जाने वाले कामों में भी किया जा सकता है। चिकित्सा क्षेत्र में ऐसी तकनीक के इस्तेमाल के लिए सुरक्षा जांच और मानव विशेषज्ञों की निगरानी जरूरी होगी।

कृषि: स्मार्ट मशीनें खेतों में फसलों की निगरानी, खरपतवार की पहचान, कटाई और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल में मदद कर सकती हैं। बड़े खेतों में काम करने वाले किसानों के लिए ऐसी तकनीक उपयोगी हो सकती है, खासकर जहां मजदूरों की उपलब्धता सीमित हो या हाथ से काम करने में अधिक समय लगता हो।

विनिर्माण और उद्योग: AI आधारित रोबोट उत्पादों की जांच, सामान उठाने और उत्पादन लाइन पर बदलती परिस्थितियों के अनुसार काम करने में मदद कर सकते हैं। इससे काम की गति और गुणवत्ता बेहतर करने के साथ कुछ जोखिम कम करने में भी मदद मिल सकती है।

परिवहन और सेवा क्षेत्र: सेंसर और कैमरों से लैस स्वचालित वाहन तथा मोबाइल रोबोट अपने आसपास की वस्तुओं और रास्ते में आने वाली बाधाओं को पहचानकर आगे बढ़ने की योजना बना सकते हैं। ऐसे सिस्टम को सुरक्षित बनाने के लिए अलग-अलग परिस्थितियों में व्यापक परीक्षण जरूरी है।

अंतरिक्ष अनुसंधान: स्वचालित मशीनें उन जगहों पर खोज और जांच में मदद कर सकती हैं, जहां मनुष्यों का सीधे पहुंचना या लगातार नियंत्रण बनाए रखना कठिन होता है। ऐसी मशीनों को सेंसर से मिली जानकारी के आधार पर निर्णय लेने में सक्षम होना पड़ता है।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये फिजिकल AI के संभावित उपयोग हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि IIT (BHU) ने इन सभी क्षेत्रों में खास परियोजनाएं शुरू करने की घोषणा कर दी है।

फिजिकल AI में करियर कैसे बनाएं?

फिजिकल AI में करियर बनाने के इच्छुक विद्यार्थियों को गणित, भौतिक विज्ञान, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग और इंजीनियरिंग की बुनियादी जानकारी मजबूत करनी चाहिए। आगे चलकर वे अपनी रुचि के अनुसार रोबोटिक्स इंजीनियरिंग, मशीन लर्निंग, एम्बेडेड सिस्टम, कंप्यूटर विजन, औद्योगिक ऑटोमेशन और स्वचालित वाहनों जैसे क्षेत्रों में पढ़ाई या विशेषज्ञता हासिल कर सकते हैं।

इस क्षेत्र की खास बात यह है कि इसमें अलग-अलग तकनीकी विषयों की जानकारी को जोड़कर काम करना पड़ता है। उदाहरण के लिए, किसी रोबोट को निर्णय लेने के लिए सॉफ्टवेयर, आसपास की जानकारी जुटाने के लिए सेंसर और कार्रवाई करने के लिए यांत्रिक हिस्सों की जरूरत होती है। इन सभी का सही तालमेल जरूरी है।

फिजिकल AI से जुड़े संभावित करियर विकल्पों में रोबोटिक्स इंजीनियर, AI इंजीनियर, ऑटोमेशन इंजीनियर, कंप्यूटर विजन इंजीनियर और रिसर्च साइंटिस्ट शामिल हैं। अलग-अलग पदों के लिए योग्यता और अनुभव की जरूरत भी अलग हो सकती है। कुछ शोध पदों के लिए पोस्ट ग्रेजुएशन या उच्च डिग्री जरूरी हो सकती है।

विद्यार्थियों को यह भी समझना चाहिए कि केवल किसी खास डिग्री में दाखिला लेने से नौकरी की गारंटी नहीं मिलती। इस क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव, समस्याओं को हल करने की क्षमता, विषयों की मजबूत समझ और वास्तविक मशीनों के साथ काम करने का कौशल महत्वपूर्ण रहेगा।

IIT BHU की यह पहल क्यों है महत्वपूर्ण?

फिजिकल AI और ऑटोनॉमस सिस्टम्स स्कूल AI की पढ़ाई को वास्तविक दुनिया की इंजीनियरिंग समस्याओं से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हो सकता है। इससे विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल केवल चैटबॉट या सॉफ्टवेयर बनाने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए मशीनों को नियंत्रित करने, फैक्ट्रियों में काम आसान बनाने, फसलों की निगरानी करने और कठिन परिस्थितियों में तकनीकी सहायता देने जैसी संभावनाएं भी विकसित हो सकती हैं।

यह क्षेत्र उन विद्यार्थियों के लिए खास तौर पर उपयोगी हो सकता है, जिन्हें कोडिंग के साथ मशीनें बनाना और वास्तविक समस्याओं के तकनीकी समाधान तैयार करना पसंद है।

हालांकि, इस पहल से जुड़े पाठ्यक्रम, प्रवेश प्रक्रिया और शोध सुविधाओं की वास्तविक स्थिति के बारे में जानकारी के लिए IIT (BHU) की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखना जरूरी होगा।

तकनीक में करियर बनाने की योजना बना रहे विद्यार्थियों के लिए फिजिकल AI एक उभरता हुआ क्षेत्र है। इसका महत्व इसलिए बढ़ रहा है क्योंकि भविष्य की कई तकनीकों में कंप्यूटर की बुद्धिमत्ता को वास्तविक दुनिया में काम करने वाली मशीनों से जोड़ना जरूरी होगा।

Raish Ahmed

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