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तमिलनाडु के सरकारी स्कूलों में AI से पढ़ाई की तैयारी, शिक्षक बनाएंगे वीडियो और डिजिटल लर्निंग सामग्री

तमिलनाडु सरकार सरकारी हाई स्कूलों और हायर सेकेंडरी स्कूलों के शिक्षकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल का इस्तेमाल करने का प्रशिक्षण दे रही है। इसके तहत शिक्षक एनिमेटेड वीडियो, ऑडियो क्लिप, तस्वीरें, गाने और पहेली पर आधारित इंटरैक्टिव गेम जैसी डिजिटल शिक्षण सामग्री तैयार करना सीखेंगे। इस पहल का उद्देश्य AI को रोजमर्रा की कक्षा में पढ़ाने की प्रक्रिया का हिस्सा बनाना है।

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) की ओर से संचालित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के जरिए शिक्षकों को कठिन विषयों और अवधारणाओं को आसान तरीके से समझाने में मदद मिलेगी। साथ ही, कक्षा में पढ़ाई को अधिक रोचक और छात्रों की भागीदारी वाला बनाने पर जोर दिया जाएगा।

कार्यक्रम के पहले चरण में भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और गणित के पोस्टग्रेजुएट शिक्षकों को जिला स्तर पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण अक्टूबर 2026 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। 28 अक्टूबर को प्रकाशित दिनमलर की एक रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षक नवंबर से कक्षाओं में AI की मदद से तैयार शिक्षण सामग्री का इस्तेमाल शुरू कर सकते हैं। बाद के चरणों में अन्य विषयों के शिक्षकों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।

पहले से तैयार वीडियो की जगह शिक्षक खुद बनाएंगे डिजिटल सामग्री

यह पहल तमिलनाडु की मौजूदा सूचना एवं संचार तकनीक (ICT) आधारित शिक्षण व्यवस्था में बदलाव का संकेत है। पिछले चार वर्षों से राज्य स्तर पर एक विशेष टीम अलग-अलग पाठों के लिए वीडियो तैयार करती थी और उन्हें सरकारी स्कूलों तक पहुंचाया जाता था।

नई व्यवस्था में शिक्षकों को अपने विषय और कक्षा की जरूरतों के अनुसार खुद डिजिटल सामग्री तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए Google के वीडियो टूल, NotebookLM, Claude और ChatGPT जैसे AI टूल का इस्तेमाल सिखाया जाएगा।

इन टूल की मदद से शिक्षक एनिमेटेड वीडियो, ऑडियो सामग्री, तस्वीरें, गाने और सरल शैक्षिक गेम तैयार कर सकेंगे। इससे उन्हें पढ़ाए जाने वाले विषय और छात्रों की समझ के स्तर के अनुसार सामग्री बनाने में मदद मिलेगी।

प्रशिक्षण पूरा होने तक प्रत्येक शिक्षक से AI की मदद से तैयार कम से कम ऐसी वीडियो सामग्री विकसित करने की अपेक्षा है, जिसका इस्तेमाल कक्षा में पढ़ाने के दौरान किया जा सके।

कठिन विषयों को आसान बनाने में मदद करेगा AI

कार्यक्रम से जुड़े समन्वयकों के अनुसार, पढ़ाई में AI के इस्तेमाल से कठिन अवधारणाओं को दृश्य और इंटरैक्टिव माध्यमों के जरिए समझाना आसान हो सकता है। उदाहरण के लिए, विज्ञान में बल, ऊर्जा और दूरी जैसे विषयों को एनिमेशन के माध्यम से समझाया जा सकता है। गणित की अवधारणाओं को भी दृश्य उदाहरणों की मदद से अधिक स्पष्ट बनाया जा सकता है।

इस तरीके से छात्रों को केवल किताबों में दी गई जानकारी पढ़ने के बजाय विषयों को देखकर और गतिविधियों के माध्यम से समझने का अवसर मिलेगा। इससे पढ़ाई में उनकी रुचि बढ़ाने और कठिन विषयों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिल सकती है।

इस पहल का एक अन्य उद्देश्य शिक्षकों को पढ़ाने के तरीके में अधिक स्वतंत्रता देना है। अभी तक उन्हें काफी हद तक राज्य स्तर पर तैयार वीडियो और अन्य सामग्री पर निर्भर रहना पड़ता था। नई व्यवस्था में वे अपनी कक्षा की जरूरतों और छात्रों के सीखने के स्तर के अनुसार सामग्री तैयार कर सकेंगे।

AI आधारित पढ़ाई की सफलता के लिए जरूरी होंगी डिजिटल सुविधाएं

सरकारी स्कूलों में AI आधारित शिक्षण व्यवस्था लागू करने की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि शिक्षक इन डिजिटल संसाधनों को नियमित कक्षा शिक्षण में कितनी प्रभावी तरीके से शामिल कर पाते हैं।

इसके लिए स्कूलों में कंप्यूटर, अन्य डिजिटल उपकरणों और इंटरनेट कनेक्टिविटी की उपलब्धता महत्वपूर्ण होगी। साथ ही, AI से तैयार सामग्री की तथ्यात्मक शुद्धता जांचना और इन टूल का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करना भी जरूरी है।

AI टूल से तैयार सामग्री में गलत जानकारी या भ्रामक उदाहरण शामिल हो सकते हैं। इसलिए शिक्षकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि छात्रों को दिखाई जाने वाली सामग्री पाठ्यक्रम के अनुरूप और सही हो। अन्य विषयों के शिक्षकों तक इस प्रशिक्षण का विस्तार होने के साथ इन पहलुओं पर ध्यान देना भी महत्वपूर्ण होगा।

तमिलनाडु की यह पहल स्कूलों में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने और शिक्षकों को डिजिटल शिक्षण के नए तरीकों से जोड़ने की दिशा में एक कदम है। इसका वास्तविक प्रभाव इस बात से तय होगा कि AI आधारित सामग्री छात्रों की समझ, कक्षा में उनकी भागीदारी और सीखने के अनुभव को कितना बेहतर बना पाती है।

Raish Ahmed

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