
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली में शोध कार्य की रफ्तार पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ी है। संस्थान ने 2020 से 2025 के बीच जितनी पीएचडी डिग्रियां प्रदान की हैं, उतनी संख्या इससे पहले कई दशकों में मिलाकर भी मुश्किल से पहुँची थी। यह तेजी न सिर्फ IIT दिल्ली की रिसर्च क्षमता को दिखाती है, बल्कि उच्च शिक्षा में बढ़ती विशेषज्ञता का भी संकेत है।
पाँच साल में 2,259 PhD डिग्रियां
IIT दिल्ली ने साल 2020 से 2025 के बीच कुल 2,259 पीएचडी डिग्रियां प्रदान कीं। यह आंकड़ा 2010–2019 के पूरे दशक में दी गई 2,376 डिग्रियों के लगभग बराबर है। दिलचस्प बात यह है कि 1966 से 1999 के 33 वर्षों में कुल 2,281 पीएचडी डिग्रियां दी गई थीं—जो अब सिर्फ पाँच साल में लगभग पूरी हो गईं।
हर दशक के साथ बढ़ता शोध
IIT दिल्ली में शोध गतिविधियों में बढ़ोतरी लगातार दिखाई देती है। 2000–2009 के बीच 1,130 पीएचडी डिग्रियां दी गईं। 2010–2019 के दशक में यह संख्या दोगुनी से भी ज्यादा हो गई। 2000 से 2025 के बीच कुल 5,765 पीएचडी डिग्रियों का आंकड़ा सामने आता है, जो शुरुआती 33 वर्षों (1966–1999) में दी गई डिग्रियों से दोगुने से भी ज्यादा है। स्पष्ट है कि संस्थान में रिसर्च कल्चर पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हुआ है।
आखिर क्यों बढ़ी PhD की संख्या?
IIT दिल्ली के अधिकारियों के मुताबिक, इस बढ़ोतरी के पीछे कई अहम कारण हैं:
1. आर्थिक सहायता और फेलोशिप में सुधार
PhD छात्रों को मिलने वाली फेलोशिप बढ़ाई गई है, जिससे शोध को प्रोत्साहन मिला है। अब एक फैकल्टी मेंबर के साथ औसतन 5.5 पीएचडी छात्र जुड़े हैं। यदि किसी छात्र का मार्गदर्शन दो प्रोफेसर करते हैं, तो उसे अनुपातिक रूप से गिना जाता है।
2. केंद्र सरकार की योजनाएं
सरकार द्वारा लागू की गई योजनाओं ने रिसर्च को मजबूत आधार दिया है। Prime Minister’s Research Fellowship (PMRF) ने विशेष रूप से मेधावी छात्रों को पीएचडी की ओर आकर्षित किया है। इसके चलते न सिर्फ एडमिशन बढ़े, बल्कि डिग्री पूरी करने की दर भी बेहतर हुई है।
3. अत्याधुनिक रिसर्च सुविधाएं
IIT दिल्ली ने अपनी रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर को भी नई दिशा दी है। सेंट्रल रिसर्च फैसिलिटी में मॉडर्न लैब्स, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सिस्टम और अत्याधुनिक उपकरणों की उपलब्धता ने शोध का स्तर बेहतर किया है।
4. विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग
IIT दिल्ली ने अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ संयुक्त पीएचडी कार्यक्रम शुरू किए हैं। इनमें University of Queensland (ऑस्ट्रेलिया) और National Yang Ming Chiao Tung University (ताइवान) जैसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय शामिल हैं। इन साझेदारियों के माध्यम से रिसर्च वर्क को अंतरराष्ट्रीय मापदंडों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।
संस्थान का कहना है कि अब पीएचडी ट्रेनिंग को फंडेड रिसर्च प्रोजेक्ट्स से जोड़ा जा रहा है, जिससे छात्रों को बेहतर अनुभव और ग्लोबल एक्सपोज़र मिल रहा है।
IIT दिल्ली में बढ़ती पीएचडी डिग्रियों की संख्या सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि यह देश में रिसर्च इकोसिस्टम के मजबूत होने की बड़ी तस्वीर पेश करती है। बेहतर फेलोशिप, आधुनिक सुविधाएं, सरकारी योजनाओं का सहयोग और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां—इन सभी ने मिलकर IIT दिल्ली को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत रिसर्च हब के रूप में स्थापित किया है।




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