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नकली नोट और फर्जी दस्तावेज पकड़ना होगा आसान? IIT Guwahati के शोधकर्ताओं ने विकसित की नई सुरक्षा तकनीक

नकली नोट और फर्जी दस्तावेज पकड़ना होगा आसान? IIT Guwahati के शोधकर्ताओं ने विकसित की नई सुरक्षा तकनीक

नकली नोट और फर्जी दस्तावेज पकड़ना होगा आसान? IIT Guwahati के शोधकर्ताओं ने विकसित की नई सुरक्षा तकनीक

देश और दुनिया में नकली नोट, फर्जी दस्तावेज और नकली ब्रांडेड उत्पादों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। इसी चुनौती से निपटने के लिए Indian Institute of Technology Guwahati के शोधकर्ताओं ने एक नई नैनोमैटेरियल आधारित सुरक्षा तकनीक विकसित की है, जो पारंपरिक सुरक्षा प्रणालियों की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित और जटिल मानी जा रही है।

यह नई तकनीक ऐसी विशेष प्रकाश उत्सर्जित करने वाली नैनोक्रिस्टल सामग्री पर आधारित है, जो अलग-अलग परिस्थितियों में खास तरह की प्रकाशीय पहचान यानी ऑप्टिकल सिग्नेचर तैयार कर सकती है। इससे नकली उत्पादों और दस्तावेजों की पहचान करना आसान हो सकता है, जबकि उनकी नकल तैयार करना काफी मुश्किल माना जा रहा है।

यह शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल Advanced Optical Materials में प्रकाशित हुआ है। इस अध्ययन में IIT Guwahati के फिजिक्स विभाग के प्रोफेसर सैकत भौमिक, प्रोफेसर पी. के. गिरी, लतिका जुनेजा और गरिमा चौधरी शामिल रहे।

क्यों बढ़ रही है नई सुरक्षा तकनीकों की जरूरत

शोधकर्ताओं के अनुसार, आज की आधुनिक प्रिंटिंग और इमेजिंग तकनीकों के कारण पारंपरिक सुरक्षा उपायों जैसे होलोग्राम, बारकोड और वॉटरमार्क की नकल करना पहले की तुलना में आसान हो गया है। इसका असर बैंकिंग, फार्मास्यूटिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, लग्जरी प्रोडक्ट्स और पहचान दस्तावेज जैसे कई क्षेत्रों पर पड़ रहा है।

इसी वजह से ऐसी सुरक्षा प्रणालियों की जरूरत महसूस की जा रही है जिन्हें कॉपी करना बेहद कठिन हो और जिनमें कई स्तर की सुरक्षा मौजूद हो।

क्या है नई तकनीक की खासियत

शोधकर्ताओं ने विशेष प्रकार के ‘पेरोव्स्काइट नैनोक्रिस्टल’ विकसित किए हैं। ये बेहद सूक्ष्म क्रिस्टल होते हैं, जो अपनी ऑप्टिकल और इलेक्ट्रॉनिक खूबियों के लिए जाने जाते हैं। इनकी मदद से बहुत शुद्ध और सटीक रंग तैयार किए जा सकते हैं।

हालांकि, अब तक इस तरह की सामग्री के साथ सबसे बड़ी समस्या यह थी कि यह गर्मी, नमी और बदलते वातावरण में अस्थिर हो जाती थी। इस समस्या को दूर करने के लिए शोधकर्ताओं ने नैनोक्रिस्टल के चारों ओर डबल-लेयर प्रोटेक्टिव कोटिंग तैयार की। इससे इनकी गर्मी और रसायनों के प्रति सहनशीलता बढ़ गई, जबकि प्रकाश उत्सर्जन की क्षमता भी बनी रही।

लेजर तकनीक से बनाए गए माइक्रो सिक्योरिटी पैटर्न

रिसर्च टीम ने ‘डायरेक्ट लेजर राइटिंग’ तकनीक की मदद से बेहद सूक्ष्म सुरक्षा पैटर्न तैयार किए। इनकी रिजॉल्यूशन 10 से 40 माइक्रोमीटर के बीच बताई गई है। खास बात यह है कि इसके लिए पारंपरिक लिथोग्राफिक मास्क की जरूरत नहीं पड़ी।

शोधकर्ताओं का कहना है कि यह तकनीक सामान्य फ्लोरोसेंट सिक्योरिटी लेबल से अलग तरीके से काम करती है। उदाहरण के तौर पर, कुछ फ्लोरोसेंट पैटर्न गर्म करने पर गायब हो सकते हैं और विशेष रासायनिक प्रक्रिया के बाद फिर से दिखाई दे सकते हैं।

यही वजह है कि किसी भी नकली उत्पाद निर्माता के लिए केवल पैटर्न की नकल करना काफी नहीं होगा, बल्कि उसे नैनोक्रिस्टल के पूरे व्यवहार और पर्यावरणीय प्रतिक्रिया को भी दोहराना पड़ेगा, जो बेहद कठिन माना जा रहा है।

“4D एंटी-काउंटरफिटिंग” नाम दिया गया

रिसर्च टीम ने इस नई प्रणाली को “4D Anticounterfeiting” नाम दिया है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में करेंसी नोट, पासपोर्ट, पहचान पत्र, लग्जरी उत्पाद और ब्रांडेड उपभोक्ता वस्तुओं की सुरक्षा में अहम भूमिका निभा सकती है।

इसके अलावा यह लेजर पैटर्निंग तकनीक माइक्रो-LED डिस्प्ले, वियरेबल डिवाइसेज और ऑगमेंटेड रियलिटी सिस्टम में भी इस्तेमाल की जा सकती है।

हालांकि शोधकर्ताओं ने साफ किया है कि यह तकनीक फिलहाल प्रयोगशाला स्तर पर है और व्यावसायिक उपयोग से पहले इसे और परीक्षणों और सत्यापन प्रक्रियाओं से गुजरना होगा।

Asmita Sarkar

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