
दिल्ली की अनौपचारिक बस्तियों में सुरक्षित पीने के पानी की समस्या के बीच एक छात्रा ने ऐसी तकनीक विकसित की है, जो बिना किसी रसायन के घरों में जमा पानी को कीटाणुरहित करने में मदद कर रही है। Project Amrit के तहत तैयार की गई यह तकनीक सबमर्सिबल UV-C LED Sterilisation Unit पर आधारित है। इसे पानी से भरी बाल्टी, मटके या ड्रम में सीधे रखा जा सकता है।
इस परियोजना की शुरुआत देविका राज बत्रा ने की है। वह नई दिल्ली के Modern School, Vasant Vihar की कक्षा 12 की छात्रा हैं। उनका प्रोजेक्ट खास तौर पर उन इलाकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जहां पानी की सप्लाई नियमित नहीं है और लोगों को पानी जमा करके रखना पड़ता है। ऐसे में स्टोरेज के दौरान पानी के दूषित होने का खतरा बना रहता है।
कैसे काम करती है UV-C LED तकनीक?
Project Amrit की यूनिट में UV-C LED का इस्तेमाल किया गया है। UV-C यानी पराबैंगनी प्रकाश की एक ऐसी श्रेणी है जिसका इस्तेमाल सूक्ष्मजीवों को निष्क्रिय करने के लिए किया जाता है। इस यूनिट को सीधे संग्रहित पानी में रखा जाता है और यह बिना मर्करी लैंप या पानी में अतिरिक्त रसायन मिलाए कीटाणुशोधन करती है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह यूनिट करीब 15 मिनट में 20 लीटर पानी को उपचारित करने के लिए डिजाइन की गई है और सामान्य USB Type-C कनेक्शन से चलाई जा सकती है। इसे इस तरह बनाया गया है कि लोग अपने मौजूदा पानी रखने वाले बर्तनों का इस्तेमाल जारी रखते हुए तकनीक का उपयोग कर सकें।
इस तकनीक की खासियत इसका कम रखरखाव वाला डिजाइन भी है। इसमें पानी में किसी रसायन को मिलाने की जरूरत नहीं होती और पारंपरिक रासायनिक उपचार से जुड़े अतिरिक्त कचरे की समस्या भी नहीं रहती।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि UV-C तकनीक मुख्य रूप से माइक्रोबियल संदूषण को कम करने के लिए है। यह पानी में मौजूद हर तरह के रासायनिक प्रदूषक या भारी धातुओं को हटाने वाला फिल्टर नहीं है। इसलिए पानी की गुणवत्ता के दूसरे पहलुओं की जांच भी जरूरी रहती है।
वैज्ञानिक जांच के बाद मिली मान्यता
देविका की यूनिट को केवल एक विचार या प्रोटोटाइप के तौर पर पहचान नहीं मिली है। परियोजना के विकास के दौरान घरेलू पानी के नमूनों पर माइक्रोबायोलॉजिकल परीक्षण किए गए। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उपचार से पहले और बाद के नमूनों में विभिन्न सूक्ष्मजीवों की जांच की गई, जिनमें E. coli, कुल कोलीफॉर्म, फीकल कोलीफॉर्म, Staphylococcus aureus, Salmonella और Shigella शामिल थे। रिपोर्ट में परीक्षण किए गए सूचक रोगजनकों के निष्क्रिय होने की जानकारी दी गई है।
Project Amrit को British Science Association का Gold CREST Award भी मिला है। यह छात्र-स्तर के वैज्ञानिक शोध के लिए संस्था की उच्च श्रेणी की मान्यता है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, इस सम्मान के लिए परियोजना की कार्यप्रणाली और निष्कर्षों की स्वतंत्र समीक्षा की गई थी।
कुसुमपुर पहाड़ी से शुरू हुई पहल, अब 10 हजार से ज्यादा लोगों तक पहुंच
Project Amrit का शुरुआती फील्ड काम दिल्ली के कुसुमपुर पहाड़ी इलाके में हुआ, जहां पानी की उपलब्धता के साथ उसकी सुरक्षित स्टोरेज भी एक बड़ी चुनौती है। परियोजना ने ऐसे घरों पर ध्यान दिया जहां परिवार पानी को बाल्टी, ड्रम या दूसरे बर्तनों में जमा करके रखते हैं।
उपलब्ध परियोजना आंकड़ों के अनुसार, 10,000 से अधिक लोग UV-C से उपचारित संग्रहित पानी से लाभान्वित हो रहे हैं। वहीं, जागरूकता और स्वच्छता कार्यक्रमों में शामिल लोगों में 700 से अधिक लोगों में स्वास्थ्य सुधार दर्ज किया गया है।
इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा स्थानीय लोगों को साथ जोड़ना है। Project Amrit के लिए करीब 70 प्रशिक्षित युवा स्वयंसेवकों का Amrit Ambassadors नेटवर्क तैयार किया गया है। ये लोग लोगों को तकनीक के इस्तेमाल के बारे में समझाने के साथ स्थापित यूनिटों के रखरखाव और समुदाय के साथ संपर्क में भी भूमिका निभाते हैं।
7 लाख रुपये का एंजेल निवेश
Project Amrit अब केवल एक छात्र परियोजना तक सीमित नहीं रह गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसे उद्यमी अमन गुप्ता से 7 लाख रुपये का एंजेल निवेश मिला है। इससे परियोजना को अधिक यूनिट तैयार करने और दूसरे इलाकों तक पहुंच बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
स्थानीय स्वयंसेवकों का नेटवर्क इस विस्तार में अहम भूमिका निभा रहा है। आमतौर पर किसी हार्डवेयर आधारित तकनीक को नए इलाकों तक पहुंचाने में सिर्फ उपकरण तैयार करना ही चुनौती नहीं होता, बल्कि उसके बाद नियमित रखरखाव, लोगों को उसका सही इस्तेमाल समझाना और शिकायतों पर तुरंत काम करना भी जरूरी होता है। Project Amrit ने इन कामों के लिए स्थानीय स्तर पर नेटवर्क तैयार करने की कोशिश की है।
परियोजना की योजना दिल्ली-एनसीआर के दूसरे इलाकों तक इसका विस्तार करने की है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, दिसंबर 2026 तक 20,000 से अधिक लोगों तक पहुंच बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
छात्र इनोवेशन से सामुदायिक समाधान तक
Project Amrit की खासियत सिर्फ इसकी UV-C तकनीक नहीं है। इसकी पूरी कार्यप्रणाली इस सवाल पर आधारित है कि किसी नई तकनीक को उन लोगों तक कैसे पहुंचाया जाए, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।
पानी की सप्लाई अनियमित होने वाले इलाकों में परिवारों को अक्सर एक साथ ज्यादा पानी जमा करना पड़ता है। इस पानी को लंबे समय तक सुरक्षित रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। Project Amrit इसी स्टोरेज चरण पर ध्यान देता है और लोगों के मौजूदा बर्तनों में ही पानी के कीटाणुशोधन का विकल्प देने की कोशिश करता है।
देविका की पहल यह भी दिखाती है कि स्कूल स्तर पर किया गया विज्ञान और इंजीनियरिंग का काम अगर वास्तविक समस्या से जुड़ा हो और उसकी फील्ड में जांच की जाए, तो वह प्रयोगशाला से बाहर भी उपयोगी बन सकता है। Project Amrit में तकनीक के साथ वैज्ञानिक परीक्षण, स्थानीय समुदाय की भागीदारी और रखरखाव की व्यवस्था को जोड़ने की कोशिश की गई है।




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