महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर पुणे में चल रहा छात्रों का आंदोलन अब बॉम्बे हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। 7 अक्टूबर 2026 को मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से लिया, लेकिन उनसे आंदोलन खत्म कर दोबारा पढ़ाई पर ध्यान देने की अपील भी की।
मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ ने महाराष्ट्र सरकार को करीब 70 हजार खाली पदों पर भर्ती की योजना और निष्पक्ष परीक्षा प्रक्रिया को लेकर तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब और रोडमैप पेश करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर 2026 को होगी।
छात्रों की शिकायतों को कोर्ट ने माना गंभीर
पुणे में MPSC की तैयारी कर रहे छात्र परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी प्रमुख चिंताओं में कथित परीक्षा अनियमितताएं, भर्ती में देरी और चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता शामिल हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि उम्मीदवारों को परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी का संदेह है और उन्हें लगता है कि उनके साथ निष्पक्ष व्यवहार नहीं हो रहा, तो उनकी शिकायतों पर ध्यान दिया जाना जरूरी है। अदालत ने साफ किया कि प्रदर्शन कर रहे छात्र असामाजिक तत्व नहीं हैं और उन्हें अपनी वास्तविक शिकायतों को उठाने का अधिकार है।
हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि मामला अब न्यायालय के सामने है और छात्रों को अपनी पढ़ाई और करियर पर ध्यान देना चाहिए। कोर्ट ने पुणे को देश के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में से एक बताते हुए कहा कि यहां दूर-दराज से छात्र अपने भविष्य के लिए आते हैं। इसलिए आंदोलन के कारण उनकी पढ़ाई और शहर की सामान्य गतिविधियां प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
70 हजार खाली पदों पर सरकार से मांगा जवाब
सुनवाई में सबसे अहम निर्देश करीब 70 हजार खाली सरकारी पदों को लेकर रहा। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि इन पदों को किस तरह और कितनी तेजी से भरा जाएगा।
सरकार को तीन सप्ताह में यह स्पष्ट करना होगा कि अलग-अलग विभागों में कितने पद खाली हैं और भर्ती प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ाई जाएगी। अदालत ने भर्ती प्रक्रिया में उम्मीदवारों को समान अवसर और परीक्षा में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के उपायों की जानकारी भी मांगी है।
राज्य की ओर से पेश महाधिवक्ता मिलिंद साठे ने अदालत को बताया कि सरकार छात्रों की कई मांगों पर कदम उठा रही है। सरकार की ओर से भर्ती प्रक्रिया, परीक्षा व्यवस्था और MPSC से जुड़े मुद्दों पर उठाए गए कदमों की जानकारी हलफनामे के जरिए देने की बात कही गई है।
प्रदर्शन को लेकर कोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने छात्रों के प्रदर्शन के अधिकार को स्वीकार किया, लेकिन सार्वजनिक सड़कों और आम लोगों की आवाजाही प्रभावित न करने पर भी जोर दिया। अदालत ने कहा कि यदि छात्र प्रदर्शन करना चाहते हैं तो इसके लिए जरूरी अनुमति लें और निर्धारित स्थान पर आंदोलन करें।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि प्रदर्शन कर रहे अलग-अलग समूहों का रुख एक जैसा नहीं है। एक समूह ने आंदोलन वापस लेने की बात कही, जबकि अन्य प्रदर्शनकारी निर्धारित स्थान पर आंदोलन जारी रखने की तैयारी में थे। इसलिए अदालत की अपील के बाद भी आंदोलन के पूरी तरह खत्म होने की स्थिति स्पष्ट नहीं है।
अदालत ने पुलिस से भी संयम बरतने की अपेक्षा जताई। सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई उनके भविष्य और करियर पर असर डाल सकती है। राज्य की ओर से भी पुलिस द्वारा अब तक संयम बरतने की बात कही गई।
MPSC की जांच को लेकर सरकार का क्या रुख?
MPSC के कामकाज और कथित अनियमितताओं को लेकर महाराष्ट्र सरकार ने जांच की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अनुसार, MPSC अध्यक्ष जैसे संवैधानिक पद पर सीधे राज्य सरकार कार्रवाई नहीं कर सकती। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 317 में तय प्रक्रिया का पालन करना होता है।
फडणवीस ने छात्रों का भरोसा कायम करने के लिए मौजूदा और पूर्व पदाधिकारियों समेत आयोग के कामकाज की जांच कराने की बात कही है। सरकार ने इस मामले में राज्यपाल के स्तर पर भी प्रक्रिया आगे बढ़ाने का संकेत दिया है। यदि जांच में किसी तरह की गड़बड़ी या कदाचार सामने आता है, तो संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
इससे पहले छात्रों के प्रतिनिधिमंडल और मुख्यमंत्री के बीच हुई बैठक में सरकार ने बड़े स्तर पर भर्ती, MPSC परीक्षाओं को ऑफलाइन कराने और कथित पेपर लीक की जांच सहित कई मुद्दों पर कदम उठाने का भरोसा दिया था।
अब सरकार के रोडमैप पर नजर
बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब इस मामले में अगला महत्वपूर्ण कदम महाराष्ट्र सरकार का जवाब होगा। सरकार को तीन सप्ताह के भीतर यह बताना है कि करीब 70 हजार रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ेगी और MPSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
छात्रों की मुख्य मांग परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में भरोसा बहाल करने की है। दूसरी ओर, अदालत ने भी स्पष्ट किया है कि उम्मीदवारों की शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, लेकिन छात्रों को अपनी पढ़ाई और करियर को नुकसान पहुंचने से बचाना भी जरूरी है।
अब अगली सुनवाई 25 नवंबर 2026 को होगी। तब तक सरकार के जवाब और भर्ती रोडमैप से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि महाराष्ट्र में MPSC भर्ती प्रक्रिया को लेकर आगे की दिशा क्या होगी।




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