CBSE 12वीं बोर्ड परीक्षा में अकाउंटेंसी और मैथ्स के पेपर में कैलकुलेटर इस्तेमाल करने की अनुमति देने का मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। इस संबंध में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। बुधवार, 4 नवंबर 2026 को मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE), राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) तथा राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र PARAKH को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
याचिका में 12वीं के छात्रों को अकाउंटेंसी और मैथ्स की परीक्षा में बेसिक यानी सामान्य, नॉन-प्रोग्रामेबल कैलकुलेटर इस्तेमाल करने की अनुमति देने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन विषयों में लंबी गणनाओं के कारण छात्रों का काफी समय खर्च हो जाता है। ऐसे में उन्हें सवालों की समझ और विषय पर अपनी पकड़ दिखाने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता।
इस मामले में एक अहम बात यह भी है कि CBSE की अपनी करिकुलम कमेटी नवंबर 2024 में 12वीं अकाउंटेंसी की परीक्षा में बेसिक कैलकुलेटर इस्तेमाल करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे चुकी है। हालांकि, इस प्रस्ताव को अब तक लागू नहीं किया गया है।
12वीं बोर्ड परीक्षा में किस तरह के कैलकुलेटर की मांग?
दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में छात्रों को सामान्य और नॉन-प्रोग्रामेबल कैलकुलेटर इस्तेमाल करने की अनुमति देने की मांग की गई है। ऐसे कैलकुलेटर में जोड़, घटाव, गुणा, भाग और प्रतिशत जैसी सामान्य गणनाएं की जा सकती हैं। इनमें प्रोग्रामिंग या जटिल गणनाओं के लिए विशेष सुविधाएं नहीं होतीं।
याचिकाकर्ताओं ने अकाउंटेंसी के साथ मैथ्स की परीक्षा में भी कैलकुलेटर के इस्तेमाल की संभावना पर विचार करने की मांग की है। इसके लिए CBSE को विशेषज्ञों की एक समिति गठित करने का निर्देश देने की अपील की गई है।
दिल्ली हाईकोर्ट की एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव साम्ब्रे और जस्टिस संजय शर्मा की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। सुनवाई के दौरान CBSE की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि इस विषय पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने बोर्ड से निर्देश लेने के लिए समय मांगा।
डिस्कैलकुलिया के अलावा अन्य दिव्यांग छात्रों को भी मिले सुविधा
इस जनहित याचिका में दिव्यांग छात्रों के लिए कैलकुलेटर इस्तेमाल की मौजूदा सुविधा का दायरा बढ़ाने की मांग भी की गई है।
फिलहाल CBSE की ओर से डिस्कैलकुलिया (Dyscalculia) से प्रभावित छात्रों को निर्धारित शर्तों के तहत कैलकुलेटर इस्तेमाल करने की सुविधा दी जाती है। डिस्कैलकुलिया एक ऐसी सीखने से जुड़ी समस्या है, जिसमें व्यक्ति को गणितीय संख्याओं और गणनाओं को समझने में कठिनाई होती है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह सुविधा अन्य श्रेणियों के दिव्यांग छात्रों को भी मिलनी चाहिए, जिन्हें गणितीय गणनाओं में कठिनाई होती है। उनका तर्क है कि परीक्षा में सभी छात्रों को अपनी वास्तविक शैक्षणिक क्षमता दिखाने का समान अवसर मिलना चाहिए।
याचिका में CBSE पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
याचिकाकर्ताओं ने CBSE की ओर से कैलकुलेटर के इस्तेमाल पर लगातार रोक लगाए रखने को मनमाना बताया है। उनका तर्क है कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन करता है।
याचिका के अनुसार, CBSE की करिकुलम कमेटी ने 25 और 26 नवंबर 2024 को हुई अपनी 70वीं बैठक में 12वीं अकाउंटेंसी की परीक्षा में बेसिक कैलकुलेटर इस्तेमाल करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके बाद दिसंबर 2024 में यह प्रस्ताव CBSE की गवर्निंग बॉडी के सामने भी रखा गया और वहां इसे मंजूरी मिली।
CBSE की 140वीं गवर्निंग बॉडी बैठक के आधिकारिक दस्तावेज में भी अकाउंटेंसी परीक्षा में सामान्य कैलकुलेटर के इस्तेमाल के प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने का उल्लेख है। इसमें कहा गया था कि कैलकुलेटर की मदद से छात्र लंबी गणनाओं में कम समय लगाकर विश्लेषण और केस स्टडी से जुड़े सवालों पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।
इसके बावजूद याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इस फैसले को अब तक औपचारिक रूप से अधिसूचित नहीं किया गया और न ही परीक्षा में लागू किया गया।
कैलकुलेटर की अनुमति क्यों चाहते हैं छात्र और अभिभावक?
याचिका दाखिल करने वाले छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि अकाउंटेंसी और मैथ्स जैसे विषयों में कई सवालों को हल करने के लिए लंबी गणनाएं करनी पड़ती हैं। परीक्षा के दौरान इन गणनाओं में काफी समय खर्च हो जाता है।
इसका असर छात्रों के प्रदर्शन पर पड़ सकता है, क्योंकि उन्हें सवालों की अवधारणा समझने, उनका विश्लेषण करने और सही तरीके से उत्तर लिखने के लिए कम समय मिलता है।
याचिकाकर्ताओं का मानना है कि बेसिक कैलकुलेटर की अनुमति मिलने से गणना में लगने वाला समय कम होगा। इससे छात्र केवल गणितीय हिसाब-किताब करने के बजाय सवालों को समझने और अपनी विषय संबंधी जानकारी दिखाने पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।
याचिका में यह भी कहा गया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF 2023) में रटने के बजाय विषयों की समझ, विश्लेषण और सोचने की क्षमता विकसित करने पर जोर दिया गया है। ऐसे में नियंत्रित तरीके से कैलकुलेटर के इस्तेमाल की अनुमति देना इन उद्देश्यों के अनुरूप होगा।
CBSE को विशेषज्ञ समिति बनाने का भी सुझाव
याचिकाकर्ताओं ने दिल्ली हाईकोर्ट से मांग की है कि CBSE को एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश दिया जाए। यह समिति मैथ्स की बोर्ड परीक्षा में कैलकुलेटर इस्तेमाल करने की जरूरत और उसके संभावित प्रभावों का अध्ययन करे।
इसके अलावा, समिति दिव्यांग छात्रों के लिए मौजूदा सुविधा का दायरा बढ़ाने पर भी विचार करे, ताकि डिस्कैलकुलिया के अलावा दूसरी दिव्यांगता वाले पात्र छात्रों को भी जरूरत के अनुसार यह सुविधा मिल सके।
याचिका में बताया गया है कि 17 अगस्त 2026 को संबंधित अधिकारियों को एक पत्र भेजकर नवंबर 2024 में मंजूर प्रस्ताव को लागू करने और इस संबंध में स्पष्ट जवाब देने की मांग की गई थी। हालांकि, याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, उन्हें इस पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने अदालत का रुख किया।
क्या CBSE 2027 की बोर्ड परीक्षा में कैलकुलेटर इस्तेमाल कर सकेंगे छात्र?
फिलहाल इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने केवल संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। अदालत ने अभी CBSE की 12वीं बोर्ड परीक्षा में कैलकुलेटर के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, संबंधित पक्षों को जवाब दाखिल करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया गया है। इसके बाद अदालत मामले में आगे सुनवाई करेगी।
इसलिए 2027 की CBSE 12वीं बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को फिलहाल कैलकुलेटर इस्तेमाल करने की अनुमति मिलने की उम्मीद में अपनी तैयारी के तरीके में बदलाव नहीं करना चाहिए। जब तक CBSE की ओर से कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक मौजूदा परीक्षा नियम ही लागू रहेंगे।
अदालत का अंतिम फैसला और CBSE की ओर से जारी होने वाले दिशा-निर्देश ही यह तय करेंगे कि अकाउंटेंसी और मैथ्स की परीक्षा में छात्रों को बेसिक कैलकुलेटर इस्तेमाल करने की अनुमति मिलेगी या नहीं।




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