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अब किसी भी उम्र में कर सकेंगे लॉ की पढ़ाई, BCI ने हटाई अधिकतम आयु सीमा

कानून की पढ़ाई करने की इच्छा रखने वाले युवाओं और अधिक उम्र के उम्मीदवारों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब तीन साल के एलएलबी (LLB) और पांच साल के इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स में दाखिले के लिए अधिकतम उम्र की पाबंदी नहीं रहेगी। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने दोनों कोर्स में प्रवेश के लिए तय ऊपरी आयु सीमा हटाने का फैसला किया है। परिषद ने 6 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में इसकी जानकारी दी।

इस फैसले से उन उम्मीदवारों को खास फायदा मिल सकता है, जो पढ़ाई या नौकरी के कारण पहले लॉ की पढ़ाई शुरू नहीं कर पाए और उम्र बढ़ने के बाद दाखिले की योजना बना रहे थे। अब उम्र के आधार पर उन्हें इन दोनों पाठ्यक्रमों में प्रवेश से वंचित नहीं किया जा सकेगा। हालांकि, उम्मीदवारों को संबंधित विश्वविद्यालय और कॉलेज की शैक्षणिक योग्यता तथा प्रवेश से जुड़ी दूसरी शर्तें पूरी करनी होंगी।

सुप्रीम कोर्ट में BCI ने दी फैसले की जानकारी

यह मामला सुप्रीम कोर्ट में ऋषभ दुग्गल की ओर से दायर याचिका से जुड़ा था। याचिका में बीसीआई के सितंबर 2016 के सर्कुलर को चुनौती दी गई थी। इस सर्कुलर के जरिए बार काउंसिल ने लीगल एजुकेशन रूल्स, 2008 के उस प्रावधान को फिर से लागू किया था, जिसमें लॉ कोर्स में दाखिले के लिए अधिकतम उम्र तय की गई थी।

6 नवंबर को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के सामने बीसीआई की ओर से पेश अधिवक्ता राधिका गौतम ने बताया कि परिषद की जनरल काउंसिल ने उम्र की पाबंदी हटाने का फैसला किया है। यह प्रस्ताव 5 नवंबर को पारित किया गया था।

बीसीआई के इस फैसले की जानकारी मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया। अदालत ने मामले को आगे सुनने की जरूरत नहीं समझी, क्योंकि जिस उम्र सीमा को चुनौती दी गई थी, उसे परिषद ने वापस लेने का निर्णय कर लिया था।

पहले कितनी थी लॉ कोर्स में दाखिले की उम्र सीमा?

बीसीआई के लीगल एजुकेशन रूल्स, 2008 के नियम 28 में पांच साल के इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स में दाखिले के लिए सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों की अधिकतम उम्र 20 साल तय की गई थी। वहीं अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़े वर्गों के उम्मीदवारों के लिए यह सीमा 22 साल थी।

तीन साल के एलएलबी कोर्स के लिए भी अधिकतम उम्र की शर्त रखी गई थी। हालांकि, इस पाठ्यक्रम की पुरानी उम्र सीमा को लेकर अलग-अलग कानूनी आदेशों और रिपोर्टों में अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। इसलिए उम्मीदवारों को पुराने आंकड़ों के बजाय बीसीआई के नए फैसले को ध्यान में रखना चाहिए।

अब बीसीआई के ताजा निर्णय के बाद तीन साल और पांच साल, दोनों तरह के एलएलबी पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए अधिकतम उम्र की शर्त नहीं रहेगी।

2016 के सर्कुलर से शुरू हुआ था विवाद

लॉ कोर्स में उम्र सीमा को लेकर विवाद की शुरुआत बीसीआई के सितंबर 2016 के सर्कुलर से हुई थी। इसके जरिए परिषद ने लीगल एजुकेशन रूल्स, 2008 की अनुसूची-3 के नियम 28 को दोबारा लागू कर दिया था। इस नियम में पांच साल के इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स और तीन साल के एलएलबी पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए अधिकतम उम्र निर्धारित थी।

इस फैसले को ऋषभ दुग्गल ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। मार्च 2017 में शीर्ष अदालत ने उम्र सीमा से जुड़े बीसीआई के फैसले पर रोक लगा दी थी। इसके बाद इस मुद्दे पर कानूनी प्रक्रिया जारी रही।

सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने BCI से मांगा था जवाब

25 सितंबर 2026 को मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बीसीआई से पूछा था कि क्या वह पांच साल के इंटीग्रेटेड एलएलबी कोर्स में दाखिले के लिए अधिकतम उम्र की सीमा हटाने को तैयार है। अदालत ने परिषद से इस संबंध में अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा था।

इसके बाद बीसीआई ने इस मुद्दे पर विचार किया। जनरल काउंसिल ने 5 नवंबर को उम्र की पाबंदी हटाने का प्रस्ताव पारित किया और अगले दिन सुप्रीम कोर्ट को इसकी जानकारी दी। परिषद के फैसले के बाद अदालत ने याचिका का निपटारा कर दिया।

लॉ में करियर बनाने वालों के लिए क्या बदलेगा?

बीसीआई के इस फैसले से उन लोगों के लिए कानून की पढ़ाई का रास्ता आसान होगा, जो किसी कारण से कम उम्र में एलएलबी नहीं कर पाए। नौकरी करने वाले, दूसरे विषयों में पढ़ाई पूरी कर चुके और करियर बदलने की इच्छा रखने वाले उम्मीदवार भी अब उम्र की अधिकतम सीमा की चिंता किए बिना लॉ कोर्स में दाखिले की योजना बना सकेंगे।

हालांकि, उम्र सीमा हटने का मतलब यह नहीं है कि दाखिला अपने आप मिल जाएगा। उम्मीदवारों को संबंधित कोर्स के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता, प्रवेश परीक्षा और विश्वविद्यालय या कॉलेज के अन्य नियमों का पालन करना होगा। दाखिले से पहले संबंधित संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध पात्रता शर्तों की जांच करना जरूरी है।

बीसीआई के इस फैसले से कानून की पढ़ाई को अधिक लोगों के लिए सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। अब इच्छुक उम्मीदवार अपनी उम्र के बजाय योग्यता और तैयारी के आधार पर लॉ में करियर बनाने की योजना बना सकेंगे।

Raish Ahmed

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