
भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि बड़ी संख्या में कानून के छात्रों का अदालतों में वकालत करने के बजाय कॉरपोरेट क्षेत्र की ओर रुख करना न्याय व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। वह अहमदाबाद में आयोजित गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के 16वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे, जहां उन्होंने कानूनी शिक्षा और वास्तविक पेशे के बीच के अंतर पर स्पष्ट राय रखी।
समारोह के दौरान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. एस. शांथाकुमार ने बताया कि जीएनएलयू के 93 प्रतिशत छात्र स्नातक होते ही कॉरपोरेट कंपनियों में प्लेसमेंट चुन रहे हैं। इसी आंकड़े का जिक्र करते हुए CJI ने कहा कि भारत की न्यायपालिका को अधिक प्रतिभाशाली युवा वकील और भविष्य के जज चाहिए, और राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों को इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने कहा, “कक्षा में पढ़ाई जरूरी है, लेकिन असली सीख अदालतों में मिलती है। किताबें सिद्धांत सिखाती हैं, पर सच्चा अनुभव वहीं आता है जहां बहस करनी पड़ती है, समय-सीमा निभानी होती है और तनाव में निर्णय लेने होते हैं।”
किताबें और अदालत—दो अलग दुनियाएँ
CJI सूर्यकांत ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा कि कानून की किताबों में जो पढ़ाया जाता है, वह पेशे की वास्तविक परिस्थितियों से अलग होता है। मूट कोर्ट में छात्र मेंटर की सुरक्षा में रहते हैं, जबकि असली अदालत में परिस्थितियाँ स्वयं तय नहीं होतीं। उन्होंने कहा कि यह शिक्षा की कमी नहीं, बल्कि सीख और अनुभव के बीच का स्वाभाविक अंतर है।
उनके अनुसार, शुरुआती वर्षों का अनुभव ही एक वकील को पेशे की बारीकियाँ सिखाता है—कब चुप रहना है, जजों के रुख को कैसे समझना है, चिंतित मुवक्किल को भरोसा कैसे देना है, और हार के बाद भरोसा कैसे बनाए रखना है। ये बातें किसी पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं होतीं, इन्हें पेशे में रहकर ही सीखा जाता है।
टी20 वर्ल्ड कप का उदाहरण देकर समझाया करियर का पाठ
CJI सूर्यकांत ने हाल ही के टी20 वर्ल्ड कप का उदाहरण देते हुए कहा कि क्रिकेट टीम की तरह ही वकालत के पेशे में भी हर व्यक्ति की अपनी भूमिका होती है। उन्होंने कहा, “कोई यह उम्मीद नहीं करता कि सूर्यकुमार यादव डेथ ओवरों में गेंदबाजी करें या जसप्रीत बुमराह अंतिम ओवर में बल्लेबाजी करें। हर खिलाड़ी वही करता है जिसमें वह बेहतरीन है।”
उन्होंने छात्रों से कहा कि करियर की शुरुआत में भले ही भूमिका स्पष्ट न हो, लेकिन आगे बढ़ने वाले वही लोग होते हैं जो अपनी ताकत पहचानते हैं और उसी दिशा में मेहनत करते हैं।
समारोह में गुजरात हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल भी मौजूद थीं। CJI ने उम्मीद जताई कि भविष्य में अधिक से अधिक युवा कानून के छात्र अदालतों में आकर न्याय व्यवस्था को मजबूत करेंगे।




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